India China Relations : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और चीन के आपसी संबंधों को लेकर एक बार फिर देश का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने और व्यापार-निवेश को आगे बढ़ाने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति का स्थिर रहना बेहद जरूरी है। अगर सीमा पर किसी भी तरह की हलचल या गड़बड़ी होती है, तो उसका सीधा असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा।
सीमा पर शांति और व्यापार का सीधा संबंध
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा से चीन से यही कहता आ रहा है कि यदि वे सामान्य संबंध चाहते हैं, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना पहली शर्त है। उन्होंने बताया कि साल 2024 के बाद से एलएसी पर स्थिति में काफी हद तक सुधार आया है और उसी के अनुरूप दोनों देशों के रिश्ते भी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहे हैं। पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के खत्म होने के बाद दोनों पक्षों ने विश्वास बहाली के कई कदम उठाए हैं।
चीन के साथ व्यापार असंतुलन पर जताई चिंता
जयशंकर ने बातचीत के दौरान चीन के साथ बढ़ते आर्थिक असंतुलन पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज दोनों देशों के बीच व्यापार का संतुलन पूरी तरह से चीन के पक्ष में झुका हुआ है। भारतीय कंपनियों को चीन के बाजारों में उस तरह की पहुंच और समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जितने अवसर भारत में चीनी कंपनियों को दिए जाते हैं। उन्होंने साफ किया कि सीमा विवाद के पूरी तरह सुलझने से पहले भी व्यापार हो सकता है, लेकिन इसके लिए सीमा पर शांति बनी रहना सबसे पहली जरूरत है।
2020 की गलवान झड़प का किया जिक्र
विदेश मंत्री ने 2020 में हुई गलवान घाटी की हिंसक झड़प को याद करते हुए बताया कि 1975 से लेकर 2020 तक यानी पूरे 45 सालों तक सीमा पर एक भी सैनिक की जान नहीं गई थी। लेकिन 2020 में हुए उस हादसे ने 45 साल पुरानी यथास्थिति को बदलकर रख दिया था। इस घटना के बाद ही दोनों देशों के रिश्तों में भारी तनाव आ गया था, जिसे सामान्य होने में कई साल का लंबा वक्त लग गया।
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