Chandausi News : उम्र की ढलती शाम में सबसे ज्यादा जरूरत अपनों के साथ की होती है। कोई पास बैठकर हाल पूछ ले, समय पर दवा दे दे या बस इतना कह दे-‘आप चिंता मत करो, हम हैं।’ लेकिन चंदौसी के वृद्धाश्रम में रह रहे 62 बुजुर्गों की जिंदगी में यह अपनापन कहीं पीछे छूट गया है। किसी को परिवार का साथ नहीं मिला तो कोई अकेलेपन का शिकार हो गया। हालात जैसे भी रहे हों, इन बुजुर्गों ने जिंदगी से हार नहीं मानी है।
अकेलेपन के बीच भी मुस्कुराते चेहरे
वृद्धाश्रम की स्थापना अप्रैल 2017 में बहजोई मार्ग स्थित गांव बबैना में हुई थी। बाद में 10 अक्टूबर 2023 से इसे चंदौसी में कैथल गेट के पास रामबाग रोड पर शिफ्ट कर दिया गया। इसकी जिम्मेदारी जनहितकारी सेवा समिति रामनगर, अलीगढ़ संभाल रही है। फिलहाल यहां 62 बुजुर्ग रह रहे हैं। इनमें ज्यादातर संभल जिले के रहने वाले हैं, जबकि कुछ बुजुर्ग बदायूं की सीमा से लगे इलाकों से भी आते हैं।
आश्रम में कदम रखते ही उम्र की लकीरें जरूर दिखाई देती हैं, लेकिन चेहरों पर मायूसी नजर नहीं आती। कोई साथी के साथ बैठकर बातचीत करता है तो कोई ताश खेलकर समय बिताता है। कुछ बुजुर्ग पुराने दिनों की यादें साझा करते हैं और कुछ अपने साथियों की बातें सुनकर मुस्कुरा देते हैं।
चंदौसी वृद्धाश्रम में मिल रहा अपनों जैसा माहौल
यहां रहने वाले बुजुर्गों में रामवीर सिंह, प्रेमवती देवी, राजेंद्र सिंह, प्रकाश, महावीर सिंह, सत्यस्वरूप, पूरन देवी और शिव देवी समेत कई लोग शामिल हैं। सभी की उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है। भले ही इन बुजुर्गों की जिंदगी में परिवार का साथ कम हो गया हो, लेकिन आश्रम में उन्हें अकेलापन महसूस न हो, इसका प्रयास किया जाता है। यहां रहने वाले बुजुर्ग एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं और अपनी जिंदगी के अनुभव साझा करते हैं।
वृद्धाश्रम के संचालक जितेंद्र कुमार बताते हैं कि यहां रहने वाले बुजुर्गों को जरूरत की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है। माहौल ऐसा रखने का प्रयास रहता है कि उन्हें अपने घर से दूर होने का एहसास न हो।
खाने से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों का इंतजाम
आश्रम में बुजुर्गों के लिए सुबह नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसके साथ ही दूध की भी व्यवस्था है। समाज कल्याण विभाग की ओर से प्रत्येक बुजुर्ग के भरण-पोषण के लिए प्रतिदिन 114 रुपये का भुगतान किया जाता है। इसी व्यवस्था के जरिए बुजुर्गों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जाता है। यहां रहने वाले बुजुर्गों की जिंदगी भले ही आसान नहीं रही हो, लेकिन साथियों का साथ उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत देता है। किसी के साथ बैठकर दो बातें कर लेना और पुरानी यादों को साझा कर लेना भी उनके लिए खुशी का एक जरिया बन जाता है।
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