AIIMS की study में बड़ा खुलासा: किशोरियों की सेहत को लेकर AIIMS की स्टडी ने चिंता बढ़ा दी है। स्कूल जाने वाली लड़कियों में बढ़ता मोटापा और PCOS अब एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनकर सामने आ रहा है। आखिर कम उम्र में क्यों बढ़ रहा मोटापा (obesity) और PCOS का खतरा।
कम उम्र में बढ़ता वजन… बिगड़ती लाइफस्टाइल और लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम (screen time)… अब किशोरियों की सेहत के लिए चिंता की वजह बन रहा है। क्योंकि, AIIMS नई दिल्ली की एक स्टडी में स्कूल जाने वाली लड़कियों में मोटापे, मेटाबोलिक समस्याओं और PCOS के मामले सामने आए हैं। स्टडी के मुताबिक, कम फिजिकल एक्टिविटी और बदलती जीवनशैली के बीच किशोरियों में हार्मोनल और मेटाबोलिक समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है। AIIMS दिल्ली के पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी विभाग की प्रोफ़ेसर रजनी शर्मा ने बताया कि संस्थान, ‘सोसाइटी ऑफ़ एंडोक्राइन हेल्थ इन एल्डरली, एडोलसेंट, एंड चिल्ड्रन’ के साथ मिलकर स्कूलों में स्टूडेंट्स की मेटाबोलिक समस्याओं, पोषण संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं और PCOS की स्क्रीनिंग कर रहा है।
डॉ. रजनी शर्मा के मुताबिक, इस स्टडी के जरिए स्कूलों में स्टूडेंट्स की मेटाबोलिक, पोषण संबंधी और PCOS से जुड़ी समस्याओं की स्क्रीनिंग की जा रही है। समस्या मिलने पर आगे की जांच और फॉलो-अप के लिए AIIMS बुलाया जाता है। स्क्रीनिंग में किशोरियों में अनियमित पीरियड्स और PCOS के मामले भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, किशोरियों में इन बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं, बढ़ता स्क्रीन टाइम भी चिंता का विषय है, सोशल मीडिया (social media), चैटिंग और गेमिंग (gaming) में ज्यादा समय बिताने से शारीरिक गतिविधि कम होने के साथ मानसिक तनाव और व्यवहार संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। आखिर स्क्रीन टाइम से जुड़े और कौन-कौन से खतरे हैं, आइए देखते हैं –
बढ़ता स्क्रीन टाइम, बढ़ता खतरा
– सोशल मीडिया, WhatsApp, चैटिंग और गेमिंग में बढ़ा समय
– जबकि स्क्रीन टाइम बढ़ने से शारीरिक गतिविधि कम हो सकती है
– ज्यादा स्क्रीन टाइम तनाव और व्यवहार संबंधी समस्याओं से जुड़ा
– इसलिए बच्चों और किशोरों के स्क्रीन टाइम पर सीमा जरूरी
– ताकि फिजिकल एक्टिविटी और नींद के लिए पर्याप्त समय मिल सके
– डिजिटल वेल-बीइंग पर माता-पिता की निगरानी जरूरी
किशोरियों में बढ़ता मोटापा और PCOS सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली का संकेत भी है। इसलिए बेहतर पोषण, नियमित फिजिकल एक्टिविटी और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है। ताकि कम उम्र में सामने आ रही इन समस्याओं की समय रहते पहचान हो सके और किशोरियों को आगे की गंभीर स्वास्थ्य परेशानियों से बचाया जा सके।
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