Dry Eye Syndrome : आज की डिजिटल दुनिया में हमारा ज्यादातर समय स्मार्टफोन, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन के सामने बीतता है। काम की मजबूरी हो या मनोरंजन, स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल हमारी सेहत पर सीधा असर डाल रहा है। इसी वजह से इन दिनों आंखों में सूखापन यानी ‘ड्राई आई सिंड्रोम’ एक बेहद आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है।
स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग के अलावा हमारी खान-पान की आदतें और जीवनशैली भी आंखों की सेहत को प्रभावित करती हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आंखों की रोशनी और रेटिना को नुकसान पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं कि इस बीमारी के मुख्य लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।
आंखों में सूखापन के लक्षण
प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण गुप्ता के अनुसार, जब आंखों में पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं बनते या आंसू की परत जल्दी सूख जाती है, तो ड्राई आई की समस्या पैदा होती है। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:
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आंखों में लगातार जलन या खुजली महसूस होना
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आंखों के अंदर कंकड़ी या कुछ गड़ने जैसा अनुभव होना
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आंखों में लालिमा (Redness) आना
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पलकों में भारीपन रहना और धुंधला दिखाई देना
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लगातार स्क्रीन देखने पर आंखों में पानी आना या थकावट होना
20-20-20 नियम से करें आंखों का बचाव
डॉक्टरों के मुताबिक, अगर आपका काम ऐसा है जहां आपको घंटों स्क्रीन के सामने बैठना पड़ता है, तो आपको ’20-20-20 नियम’ जरूर अपनाना चाहिए। यह नियम आंखों को तुरंत आराम देने का काम करता है।
इस नियम के तहत, हर 20 मिनट का काम करने के बाद 20 सेकंड का ब्रेक लें। इस ब्रेक के दौरान कम से कम 20 फीट की दूरी पर रखी किसी वस्तु को देखें और अपनी पलकों को बार-बार झपकाएं। नियमित रूप से ऐसा करने पर आंसुओं की नमी बनी रहती है और आंखों के सूखेपन में काफी राहत मिलती है।
आहार में शामिल करें ओमेगा-3 फैटी एसिड
स्क्रीन से ब्रेक लेने के साथ-साथ सही खान-पान भी आंखों को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है। ओमेगा-3 फैटी एसिड आंखों में सूजन को कम करता है और प्राकृतिक आंसू की परत (Tear Film) को बनाए रखने में मदद करता है। यह उम्र से संबंधित मैकुलर डीजनेरेशन (ARMD), ग्लूकोमा (काला मोतिया) और रेटिना से जुड़ी बीमारियों से भी रक्षा करता है।
ओमेगा-3 मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं: अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA), ईकोसापेंटाएनोइक एसिड (EPA) और डोकोसाहेक्साएनोइक एसिड (DHA)।
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ओमेगा-3 के मुख्य स्रोत: नॉन-वेजिटेरियन लोगों के लिए साल्मन व सार्डिन जैसी फैटी मछलियां और कॉड लिवर ऑयल इसका सबसे अच्छा स्रोत हैं। वहीं, शाकाहारी लोग अपने भोजन में अलसी (Flax Seeds), चिया सीड्स, अखरोट और माइक्रोअल्गे तेल को शामिल कर सकते हैं।
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सप्लीमेंट्स लेते समय सावधानी: आप डॉक्टर की सलाह से ओमेगा-3 के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं। हालांकि, अत्यधिक सप्लीमेंट्स लेने से पेट फूलना, दस्त, मतली और त्वचा पर खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए बिना डॉक्टरी परामर्श के इनका ज्यादा सेवन न करें।







