मामले की शुरुआत कैसे हुई?
इस पूरे विवाद की शुरुआत बजरंग दल के नेता विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील सरकारी परिसर में मस्जिद का अवैध निर्माण किया गया है। इसके अलावा परिसर में डाकघर चलाने और कमरों को बाहरी लोगों को किराए पर देने की बात भी सामने आई थी।
24 मार्च 2025 को मस्जिद के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी। इसके बाद 16 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए मस्जिद पक्ष पर 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।
अदालत के फैसले के बाद कड़ा एक्शन
अदालत ने सुनवाई के दौरान माना कि इस मामले में ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ लागू नहीं होता है। इसके बाद 2 सितंबर को जिला जज ने भी सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट का अंतिम फैसला आते ही जिला प्रशासन ने बिना देर किए इसे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
मौके पर शांति और सख्त सुरक्षा व्यवस्था
कार्रवाई के वक्त एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट के साथ भारी पुलिस बल तैनात रहा। बाहरी लोगों का प्रवेश परिसर में पूरी तरह बंद कर दिया गया था। प्रशासन का कहना है कि मौके पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और शांतिपूर्ण बनी हुई है।
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