संचार मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में चेतावनी दी है कि भारत में मोबाइल कनेक्टिविटी के तेजी से विस्तार के कारण टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर्स, विशेषकर मोबाइल डिवाइस के इंटरनेशनल मोबाइल इक्विप्मेंट आईडेंटिटी (IMEI) नंबर का दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है। मंत्रालय ने नागरिकों को स्पष्ट किया है कि उन्हें किसी भी छेड़छाड़ किए गए IMEI नंबर वाले डिवाइस का उपयोग नहीं करना चाहिए। साथ ही, फेक दस्तावेज़ों या धोखाधड़ी के माध्यम से सिम कार्ड खरीदने से बचना चाहिए और अपने नाम पर खरीदे गए सिम कार्ड को किसी अनजान व्यक्ति को नहीं देना चाहिए।
केंद्र ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने नाम पर सिम कार्ड खरीदकर उसे साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल के लिए किसी अन्य व्यक्ति को देता है, तो उसे भी कानूनी रूप से अपराधी माना जाएगा। इस प्रकार, छेड़छाड़ किए गए IMEI नंबर वाले मोबाइल या धोखाधड़ी से प्राप्त सिम का इस्तेमाल गंभीर कानूनी परिणाम ला सकता है।
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नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अपने डिवाइस का IMEI संचार साथी पोर्टल या संचार साथी ऐप के माध्यम से वेरिफाई करें। इस ऐप में ब्रांड, मॉडल और निर्माता की जानकारी आसानी से उपलब्ध है।
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, दूरसंचार अधिनियम, 2023 मोबाइल और अन्य डिवाइस के IMEI सहित टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर्स से छेड़छाड़ पर सख्त दंड का प्रावधान करता है। धारा 42(3)(सी) IMEI या अन्य टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर्स में छेड़छाड़ को रोकती है, जबकि धारा 42(3)(ई) धोखाधड़ी के माध्यम से सिम कार्ड या टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर्स प्राप्त करने पर रोक लगाती है।