Ayodhya केवल श्रीराम जन्मभूमि के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन शिवालयों और धार्मिक स्थलों के लिए भी जानी जाती है। सावन के इस पावन महीने में अयोध्या से एक खास खबर सामने आ रही है। मिल्कीपुर के रामपुरवा गांव में स्थित विघ्नेश्वर महादेव मंदिर (vighneshwar mahadev mandir) में देश का सबसे ऊंचा त्रिशूल स्थापित किया गया है। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई इस स्थापना के बाद से ही यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।
60 फीट ऊंचे त्रिशूल की बनावट और वजन
इस विशाल त्रिशूल की स्थापना सावन के पहले सोमवार को पूरे विधि-विधान और पूजा-पाठ के साथ की गई। अगर इसकी बनावट और आकार की बात करें तो यह बेहद खास है:
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ऊंचाई और चौड़ाई: इस त्रिशूल की कुल ऊंचाई 60 फीट और चौड़ाई लगभग 11 फीट है।
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कुल वजन: इसका वजन करीब 8 कुंतल (800 किलोग्राम) है।
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निर्माण स्थल: इसे मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में तैयार किया गया है।
यह प्राचीन शिव मंदिर श्रीराम जन्मभूमि से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हाल ही में इस मंदिर का पुनर्निर्माण राम मंदिर की तर्ज पर नागर शैली में कराया गया है, जिससे इसका स्वरूप काफी भव्य दिखाई देता है।
सामाजिक समरसता और अनोखी परंपराएं
विघ्नेश्वर महादेव मंदिर केवल अपने विशाल त्रिशूल के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी मान्यताओं और सामाजिक समरसता के संदेश के लिए भी जाना जाता है।
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365 पुजारियों की व्यवस्था: यहां किसी एक वर्ग का पुजारी नहीं होता, बल्कि सभी जातियों के 365 लोग बारी-बारी से मुख्य पुजारी बनकर पूजा-अर्चना करते हैं। यह व्यवस्था समाज में समानता और एकजुटता का संदेश देती है।
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सूर्य की किरणों का अभिषेक: इस मंदिर की एक भौगोलिक खासियत यह भी मानी जाती है कि सूर्य की पहली और आखिरी किरण सीधे भगवान शिव का अभिषेक करती है।
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घर के बने प्रसाद की परंपरा: यहां भगवान शिव को बाहर का नहीं, बल्कि भक्तों द्वारा घर से लाया गया सात्विक प्रसाद अर्पित करने का रिवाज है।
सावन के महीने में हर-हर महादेव के जयकारों के बीच स्थापित हुआ यह विशाल प्रतीक अब जन-आस्था का नया केंद्र बन चुका है। अगर आप भी सावन में अयोध्या आ रहे हैं, तो इस धाम के दर्शन जरूर कर सकते हैं।







