North Korea : कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। उत्तर कोरिया ने रविवार को ईस्ट सी (सी ऑफ जापान) की ओर एक और ‘संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल’ दागकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। दक्षिण कोरिया और जापान की सेनाओं व रक्षा मंत्रालयों ने इस नए मिसाइल प्रक्षेपण की पुष्टि की है। जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर अलर्ट जारी कर अतिरिक्त जानकारी जुटाने की बात कही है, वहीं शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मिसाइल जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर समुद्र में जा गिरी।
बैलिस्टिक मिसाइल ईस्ट सी: वॉनसान क्षेत्र से कम दूरी की मिसाइल से हलचल
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) के अनुसार, यह प्रक्षेपण उत्तर कोरिया के पूर्वी तटीय क्षेत्र वॉनसान से किया गया था। बाद की विश्लेषणात्मक रिपोर्टों में इसे कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) बताया गया।
हालांकि, मिसाइल की सटीक दूरी, अधिकतम ऊंचाई और उड़ान पथ की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति कार्यालय ने अधिकारियों को उत्तर कोरिया की हर हरकत पर पैनी नजर रखने और विमानों व समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।
उत्तर कोरिया जापान तनाव: अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास से भड़का प्योंगयांग
उत्तर कोरिया का यह कदम कोई अचानक उठाई गई प्रतिक्रिया नहीं है। दरअसल, अगस्त के अंत से सितंबर की शुरुआत तक अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने गुआम के पास पांच दिवसीय संयुक्त सैन्य अभ्यास किया था।
प्योंगयांग (उत्तर कोरिया की राजधानी) इस तरह के अभ्यासों को अपने अस्तित्व के लिए सीधे खतरे के रूप में देखता है। इससे पहले 12 सितंबर को भी उत्तर कोरिया ने ईस्ट सी की ओर कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिसे उसने अपने संयुक्त अग्निशक्ति अभ्यास का हिस्सा करार दिया था।
यह नया मिसाइल परीक्षण अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की उस हालिया कार्रवाई के तुरंत बाद हुआ है, जिसमें उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम की आलोचना की गई थी।
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के दबाव के बावजूद प्योंगयांग अपनी परमाणु हथियार क्षमता को मजबूत करने की नीति से पीछे नहीं हटेगा। उत्तर कोरिया ने स्पष्ट कर दिया है कि IAEA का कोई भी प्रस्ताव उसके परमाणु संपन्न राष्ट्र होने के आधिकारिक रुख को बदल नहीं सकता।
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