उत्तर प्रदेश की Agra पुलिस के हाथ एक बहुत बड़ी कामयाबी लगी है। पुलिस ने एक ऐसे शातिर अपराधी को दबोचा है जो पिछले ढाई दशक से भी ज्यादा समय से कानून की आंखों में धूल झोंक रहा था। इस आरोपी पर दो पुलिसवालों की बेरहमी से हत्या करने का संगीन आरोप है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने न सिर्फ अपना शहर छोड़ा, बल्कि अपना मजहब और नाम तक बदल डाला था। वह दूसरे राज्य में जाकर एक नई पहचान के साथ आम जिंदगी जी रहा था, लेकिन आखिरकार उसकी एक छोटी सी गलती भारी पड़ गई और वह पकड़ा गया।
कड़ाके की ठंड में दिया था वारदात को अंजाम
यह पूरी कहानी साल 1999 की है, जब Agra के खेरागढ़ इलाके के नगला कमाल चौराहे पर तीन पुलिसकर्मी ठंड से बचने के लिए एक चाय की दुकान के पास अलाव ताप रहे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रहे शातिर बदमाशों के एक गिरोह की नजर उन पर पड़ी। अपराधियों का मकसद पुलिसकर्मियों के पास मौजूद सरकारी राइफलें लूटना था। पुलिसकर्मियों ने बदमाशों को देखकर उनका बहादुरी से सामना किया, लेकिन संख्या में ज्यादा होने के कारण अपराधी हावी हो गए। इस खूनी संघर्ष में बदमाशों ने राइफलें लूट लीं और मौके पर ही दो सिपाहियों की जान ले ली।
पहचान छिपाकर बनाया नया आशियाना
इस दोहरे हत्याकांड के बाद आगरा पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी रही। मामले में गिरोह का मुख्य सरगना और उसका एक साथी पहले ही पुलिस एनकाउंटर में ढेर हो चुके थे, जबकि पांच अन्य को कोर्ट से उम्रकैद की सजा मिल चुकी थी। मगर इस मामले का मुख्य आरोपी भूरा लगातार गायब था, जिसकी वजह से उस पर 50 हजार रुपये का इनाम भी रखा गया था। भूरा आगरा से भागकर सीधे मध्य प्रदेश पहुंच गया। वहां उसने खुद को ‘जमील’ बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार करवा लिए। उसने भोपाल में निकाह किया, अपना परिवार बसाया, दो बच्चे किए और वहां ड्राइवर बनकर रहने लगा।
आगरा के डीसीपी पश्चिमी आदित्य कुमार ने बताया कि इस मामले में गिरोह का सरगना रमेश कुशवाह और उसका साथी नरेंद्र तोमर पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। पांच अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। लेकिन आरोपी भूरा लगातार फरार था। उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस कई वर्षों से उसकी तलाश कर रही थी।
जीजा को किया फोन और आ गया गिरफ्त में
भूरा के घरवालों ने आगरा में पुलिस को यह यकीन दिला दिया था कि वह मर चुका है, जिससे पुलिस की फाइलें ठंडी पड़ जाएं। वह खुद भी अपने परिवार से संपर्क नहीं करता था। लेकिन इतने सालों बाद उसने अपने जीजा को फोन करने की भूल कर दी। इसके बाद पुलिस ने उसके जीजा और अन्य रिश्तेदारों से पूछताछ की। जांच के दौरान भूरा का मोबाइल नंबर मिला। पुलिस ने उससे जुड़े दस्तावेज और फोटो की जांच की, जिससे उसकी नई पहचान का खुलासा हो गया। पुलिस को जैसे ही इस कॉल की भनक लगी, उन्होंने सर्विलांस की मदद से उसका नया मोबाइल नंबर और भोपाल का पता निकाल लिया। पुलिस ने वहां दबिश देकर उसे धर दबोचा। इस कामयाबी ने साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, उसके लिए कानून से बचना मुश्किल है।
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