Hydrogen Fuel in Transport: सड़क सफर को पर्यावरण के अनुकूल और सस्ता बनाने के लिए भारत सरकार इन दिनों एक बहुत बड़े मिशन पर काम कर रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को ट्रांसपोर्ट सेक्टर को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आने वाले समय में Hydrogen Fuel in Transport इंडस्ट्री का भविष्य बनने जा रहा है। सरकार इस दिशा में केवल कागजी योजनाएं नहीं बना रही, बल्कि जमीन पर काम भी शुरू हो चुका है। देश के 10 अलग-अलग प्रमुख रूटों पर हाइड्रोजन को फ्यूल के रूप में इस्तेमाल करने के लिए बड़े स्तर पर ट्रायल किए जा रहे हैं।
देश के इन 10 व्यस्त रूटों पर चल रहा है हाइड्रोजन गाड़ियों का ट्रायल
नितिन गडकरी ने उन रूटों की पूरी लिस्ट साझा की है जहां इस समय प्रायोगिक तौर पर काम चल रहा है। इन चुनिंदा रास्तों में ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-कोणार्क-पुरी और अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत जैसे बेहद व्यस्त मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा ट्रायल ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-कोणार्क-पुरी, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, पुणे-मुंबई, जमशेदपुर-कलिंगानगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि, कोच्चि-एडापल्ली, जामनगर-अहमदाबाद और नेशनल हाईवे-16 पर विशाखापत्तनम-बैयावरम रूटों पर जारी हैं। रूट पर भी यह पायलट प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य इन अलग-अलग इलाकों में Hydrogen Fuel की सफलता को परखना है।
दिल्ली में शहर के कचरे से हाइड्रोजन बनाकर चलाई जाएंगी सरकारी बसें
देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए एक बेहद अनोखा और टिकाऊ फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है। नितिन गडकरी ने बताया कि दिल्ली में नगर निगम के कचरे (सॉलिड वेस्ट) से ही हाइड्रोजन तैयार करने की योजना है। इस कचरे को पहले फैक्ट्रियों में अलग किया जाएगा और फिर बायो-डाइजेस्टर तकनीक के जरिए इसे ग्रीन फ्यूल में बदला जाएगा। इसी ईंधन से दिल्ली की पब्लिक बसें चलाई जाएंगी। जब गडकरी से पूछा गया कि क्या यह वाकई मुमकिन है, तो उन्होंने आत्मविश्वास से कहा कि पिछले 50 सालों में उनकी कही कोई भी बात गलत साबित नहीं हुई है, यह प्रोजेक्ट भी पूरी तरह सफल होगा।
हरियाणा में पटरियों पर दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
सड़क यातायात के साथ-साथ भारतीय रेलवे भी इस रेस में काफी आगे निकल चुका है। 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन संचालित पैसेंजर ट्रेन का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने जा रहा है, जिसे खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच करीब 89 किलोमीटर के रूट पर चलेगी। यह पूरी तरह से हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जिससे प्रदूषण बिल्कुल शून्य हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट रेलवे और रोडवेज दोनों में ही उपयोगिता को साबित करने में मील का पत्थर बनेगा।
सिर्फ 5 रुपये के मामूली किराए में आम जनता करेगी आधुनिक सफर
इस नई तकनीक की सबसे खूबसूरत बात यह है कि पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ यह आम जनता की जेब पर भी भारी नहीं पड़ेगी। जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली इस देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का न्यूनतम किराया महज 5 रुपये तय किया गया है, जबकि इसका अधिकतम किराया सिर्फ 25 रुपये होगा। इतने कम खर्च में अत्याधुनिक और बिना धुएं वाले सफर का मिलना भारतीय ट्रांसपोर्ट के इतिहास में एक बहुत बड़ा बदलाव है। सरकार का मानना है कि एक बार सड़क और रेल नेटवर्क पर यह तकनीक पूरी तरह कामयाब हो गई, तो भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
कुल मिलाकर देखा जाए तो Hydrogen Fuel का बढ़ता दायरा इस बात का साफ संकेत है कि भारत बहुत जल्द एक क्लीन और ग्रीन एनर्जी वाले युग में कदम रखने जा रहा है। कचरे से बसें चलाने और सिर्फ 5 रुपये में ट्रेन का सफर देने जैसी योजनाएं आम जनता के जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगी। गडकरी के इस विजन और जमीन पर चल रहे इन 10 रूटों के ट्रायल्स से उम्मीद जगती है कि बहुत जल्द हमारा सफर प्रदूषण मुक्त और बेहद किफायती हो जाएगा।







