दो Pan Card मामला: आजम खां और अब्दुल्ला को सजा

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उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड के मामले में सजा सुनाई गई है। रामपुर की एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों को सात-सात साल की सजा और 50-50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच रामपुर जेल भेज दिया गया। यह मामला दो Pan Card के उपयोग से जुड़ा था, जिसे लेकर दोनों father-son को दोषी पाया गया था।

क्या है Pan Card मामला ?    

मामला उस समय का है जब अब्दुल्ला आजम ने 2017 में स्वार विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी जन्म तिथि में बदलाव कर दिया था। शैक्षिक प्रमाणपत्रों के अनुसार, उनकी जन्म तिथि 01 जनवरी 1993 थी, जो उन्हें न्यूनतम आयु सीमा से नीचे दर्शाती थी। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी जन्म तिथि 30 सितंबर 1990 बताकर चुनाव लड़ा। इस चुनावी धोखाधड़ी का विरोध करते हुए उनके प्रतिद्वंद्वी नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उनकी विधायकी को निरस्त करने की मांग की गई थी। अदालत ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए अब्दुल्ला की विधायकी को रद्द कर दिया।

इसके बाद अब्दुल्ला और उनके पिता आजम खां के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में दो Pan Card मामले की जांच शुरू की गई थी। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम के पास दो पैन कार्ड हैं, जो दोनों ही अलग-अलग जन्म तिथियों के आधार पर जारी किए गए थे। एक पैन कार्ड में उनकी जन्म तिथि 01 जनवरी 1993 दर्ज थी, जबकि दूसरे में यह 30 सितंबर 1990 थी, जो उनकी विधायकी की वैधता को चुनौती देती थी।

अदालत का निर्णय और सजा       

रामपुर की अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा और 50-50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद दोनों father-son को कड़ी सुरक्षा के बीच रामपुर जेल भेज दिया गया। जेलर सुनील सिंह ने बताया कि उन्हें बैरक नंबर एक में रखा गया है, जो सीसीटीवी से लैस है। यह बैरक खास तौर पर उन कैदियों के लिए है, जिन्हें लंबी सजा सुनाई जाती है।

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राजनीतिक संदर्भ और प्रतिक्रियाएँ  

समाजवादी पार्टी के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला पार्टी के महत्वपूर्ण नेता रहे हैं। आजम खां, जो रामपुर से दस बार विधायक रहे हैं, पहले भी कई बार राजनीतिक विवादों में घिरे हैं। वे राज्य में चार बार कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं और 2019 में रामपुर लोकसभा सीट से सांसद भी चुने गए थे।  उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा भी विधायक और राज्यसभा सदस्य रही हैं। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम, जो 2017 में विधायक बने थे, बाद में अपनी उम्र संबंधी विवाद के कारण हाईकोर्ट से हारे थे, लेकिन 2022 में फिर से विधायक बने थे।

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