India-Oman CEPA लागू : पिछले कुछ समय से वैश्विक स्तर पर जो हालात बने हुए हैं, उन्हें देखकर एक बात साफ है कि आज के दौर में भरोसेमंद साथी मिलना बहुत मुश्किल है। रूस-यूक्रेन संकट हो या फिर ईरान-इजराइल के बीच बढ़ता तनाव, इन सभी वजहों से दुनिया भर की सप्लाई चैन बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसी स्थिति में भारत ने अपने एक पुराने और सबसे भरोसेमंद साथी ओमान के साथ अपने रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है। 1 जून से भारत और ओमान के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट यानी सीईपीए (CEPA) लागू हो चुका है।
अक्सर लोग इसे सिर्फ एक साधारण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) समझ लेते हैं, लेकिन असल में यह उससे कहीं अधिक व्यापक है। यह केवल सामानों के लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दोनों देशों के बीच निवेश, सेवाओं, प्रोफेशनल्स की आवाजाही और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने का एक पूरा खाका तैयार किया गया है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह समझौता क्या है और इससे हमारे देश को क्या फायदे होने वाले हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक ट्वीट किया, इसमें उन्होंने उस आर्टिकल का जिक्र किया जिसे वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अखबार में लिखा है, यह भारत और ओमान के बीच CEPA समझौते के बारे में है-
In this article, Union Minister Shri @PiyushGoyal highlights how the India-Oman CEPA offers Indian exporters an opportunity to diversify markets, boost job creation, safeguard farmers’ interests and foster shared prosperity between the two countries.
He emphasises that the… https://t.co/ATcvA53VWl
— PMO India (@PMOIndia) June 1, 2026
भारत ओमान द्विपक्षीय व्यापार
दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते आज के नहीं हैं, बल्कि सदियों पुराने हैं। लेकिन हाल के वर्षों में इसमें बहुत तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 10.61 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पिछले साल यह व्यापार केवल 8.94 अरब डॉलर था। यानी इसमें एक साल के भीतर ही काफी बड़ा उछाल आया है।
इस व्यापार में भारत ने ओमान को लगभग 4.06 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि ओमान से हमने 6.55 अरब डॉलर का सामान आयात किया। सामानों के अलावा सेवा क्षेत्र यानी सर्विस सेक्टर में भी दोनों देशों के रिश्ते बहुत मजबूत हुए हैं। भारत की सेवा निर्यात आय जो साल 2020 में 397 मिलियन डॉलर थी, वह साल 2023 में बढ़कर 617 मिलियन डॉलर हो गई। इसमें मुख्य रूप से आईटी (IT), टेलीकॉम, बिजनेस सर्विसेज, ट्रांसपोर्ट और ट्रैवल सेक्टर की बड़ी हिस्सेदारी रही है। यही मजबूत आर्थिक आधार इस नए समझौते की मुख्य वजह बना है।

India-Oman मुक्त व्यापार समझौता
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब पहले से ही व्यापार अच्छा चल रहा था, तो इस नए समझौते की क्या जरूरत थी? और यह आम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से कैसे अलग है?
आमतौर पर जब दो देश आपस में कोई मुक्त व्यापार समझौता करते हैं, तो उनका पूरा ध्यान आयात-निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी (टैक्स) को कम करने पर होता है। लेकिन सीईपीए इससे कई कदम आगे की व्यवस्था है। इसके तहत केवल वस्तुओं के व्यापार पर ही बात नहीं होती, बल्कि सर्विस सेक्टर, निवेश को बढ़ावा देना, दोनों देशों के पेशेवरों के लिए नियम आसान करना और व्यापार में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए आपसी सहमति बनाना भी शामिल है। सीधे शब्दों में कहें तो यह दो देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अंदरूनी तौर पर एक-दूसरे से जोड़ने का काम करता है।
India-Oman सीईपीए समझौता
इस समझौते की जो सबसे खास बात भारतीय निर्यातकों के चेहरे पर खुशी ला रही है, वह है टैक्स में मिलने वाली भारी छूट। इस समझौते के लागू होने के पहले दिन से ही भारत को ओमान के बाजार में अपने 98.08 प्रतिशत उत्पादों पर 100 प्रतिशत ड्यूटी-फ्री एक्सेस (यानी शून्य शुल्क) मिल गया है। अगर कुल निर्यात मूल्य के हिसाब से देखें, तो भारत से ओमान जाने वाले लगभग 99.38 प्रतिशत सामान पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा।
इससे पहले तक दोनों देशों के बीच व्यापार ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) व्यवस्था के तहत होता था, जिसमें भारत के केवल 15.33 प्रतिशत निर्यात को ही शून्य ड्यूटी का फायदा मिलता था। अब लगभग पूरा भारतीय सामान बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के ओमान के बाजारों में बिकने के लिए तैयार है। टैक्स हटने से हमारे उत्पाद ओमान में सस्ते हो जाएंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य देशों के मुकाबले हमारे सामान की मांग तेजी से बढ़ेगी।

किन उद्योगों को मिलेगा सबसे सीधा फायदा?
Oman का अपना कुल आयात बाजार लगभग 28 अरब डॉलर से ज्यादा का है। इस समझौते के बाद भारतीय कंपनियों के लिए इस बड़े बाजार के दरवाजे पूरी तरह खुल गए हैं। जानकारों का मानना है कि इससे भारत के उन उद्योगों को सबसे ज्यादा लाभ होगा जहां बड़े पैमाने पर लोग काम करते हैं।
मुख्य रूप से जिन क्षेत्रों को इससे सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है, वे हैं:
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इंजीनियरिंग और मशीनरी: भारत की मशीनरी और इंजीनियरिंग सामानों की ओमान में काफी मांग है।
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फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल्स: भारतीय दवाइयों और रासायनिक उत्पादों को नया बाजार मिलेगा।
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टेक्सटाइल और लेदर: कपड़े और चमड़े के व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह बेहतरीन मौका है।
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कृषि और प्रोसेस्ड फूड: भारत के कृषि उत्पाद अब आसानी से ओमान के घरों तक पहुंच सकेंगे।
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जेम्स एंड ज्वेलरी: रत्न और आभूषणों के निर्यात में भी इसके बाद तेजी आने की पूरी संभावना है।

छोटे उद्योगों और एमएसएमई के लिए नया अवसर
भारत के कुल निर्यात में छोटे, लघु और मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई (MSME) सेक्टर की बहुत बड़ी भूमिका होती है। इस समझौते को इस सेक्टर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयरन एंड स्टील, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग टूल्स और फूड प्रोसेसिंग जैसी हजारों छोटी इकाइयां जो भारत के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रही हैं, उन्हें अब सीधे Oman का बाजार मिल सकेगा।
जब इन छोटे उद्योगों को विदेशों से सीधे ऑर्डर मिलेंगे, तो उनका उत्पादन बढ़ेगा। उत्पादन बढ़ने से इन उद्योगों में निवेश आएगा और सबसे जरूरी बात यह है कि इससे हमारे देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में चल रहे इन उद्योगों के लिए यह समझौता तरक्की के नए रास्ते खोलने वाला साबित हो सकता है।
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घरेलू बाजार और किसानों की सुरक्षा का पूरा ध्यान
जब भी किसी देश के साथ व्यापार समझौता होता है, तो अक्सर हमारे देश के किसानों और छोटे व्यापारियों में एक डर बैठ जाता है कि कहीं विदेशों से सस्ता सामान भारत में न आने लगे, जिससे उनके घरेलू कारोबार को नुकसान पहुंचे। लेकिन सरकार ने इस समझौते में भारत के हितों की रक्षा के लिए एक बहुत ही संतुलित रणनीति अपनाई है।
भारत ने अपनी कुल 12,556 टैरिफ लाइनों (उत्पादों की श्रेणियों) में से केवल 77.79 प्रतिशत को ही इस समझौते के दायरे में रखा है। इसका मतलब यह है कि देश के कई संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा गया है ताकि घरेलू बाजार पर कोई आंच न आए।
जिन प्रमुख क्षेत्रों को इस समझौते में पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, उनमें शामिल हैं:
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डेयरी उत्पाद (दूध, घी, पनीर आदि)
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खाद्य तेल और ऑयलसीड्स (तिलहन)
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शहद, ताजे फल और सब्जियां
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चाय, कॉफी और विभिन्न प्रकार के मसाले
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पशु आधारित उत्पाद
इस कदम से यह साफ है कि सरकार ने वैश्विक व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ अपने देश के किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा है।
Oman की रणनीतिक और भौगोलिक अहमियत
Oman सिर्फ व्यापार के लिहाज से ही भारत के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि अगर आप दुनिया के नक्शे को देखें तो उसकी भौगोलिक स्थिति भारत के लिए बहुत मायने रखती है। खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) के अधिकांश देशों को अपना व्यापार करने के लिए ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) से होकर गुजरना पड़ता है, जो अक्सर भू-राजनीतिक तनाव के कारण संवेदनशील और असुरक्षित माना जाता है।
लेकिन Oman के साथ ऐसा नहीं है। Oman की एक बहुत बड़ी समुद्री सीमा सीधे अरब सागर और ओमान की खाड़ी से मिलती है। ओमान के प्रमुख बंदरगाह जैसे कि सालाह, होर्मुज स्ट्रेट के दायरे से पूरी तरह बाहर स्थित हैं। इसका फायदा यह है कि अगर भविष्य में कभी होर्मुज स्ट्रेट में कोई तनाव या युद्ध जैसी स्थिति पैदा होती है और वहां से व्यापार रुक जाता है, तब भी भारत ओमान के बंदरगाहों के जरिए अपना व्यापार बिना किसी रुकावट के जारी रख सकता है।
हाल ही में जब ईरान और इजराइल के बीच तनाव बढ़ा था, तब यह बात पूरी तरह साबित भी हो गई। उस दौरान जहां खाड़ी के अन्य देशों से भारत का आयात प्रभावित हुआ और उसमें गिरावट आई, वहीं ओमान से होने वाले आयात में 246 प्रतिशत से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारत ने संकट के इस समय में भी ओमान से कच्चे तेल, एलएनजी और यूरिया की अपनी जरूरत को बिना किसी बाधा के पूरा किया। इससे यह साफ हो गया कि ओमान मुश्किल समय में भारत के लिए एक भरोसेमंद व्यापार और ऊर्जा गलियारा (Energy Corridor) है।
ऊर्जा सुरक्षा और पेशेवरों के लिए नए रास्ते
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों, विशेषकर कच्चे तेल और गैस के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ओमान लंबे समय से भारत को कच्चा तेल, एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे जरूरी रसायनों की सप्लाई करता आ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने ओमान से करीब 7.2 अरब डॉलर का आयात किया था, जिसमें यही ऊर्जा और उर्वरक उत्पाद मुख्य थे। इस समझौते के बाद भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।
इसके साथ ही, यह समझौता देश के पढ़े-लिखे युवाओं और पेशेवरों के लिए भी खुशखबरी लेकर आया है। चूंकि इसमें सर्विस सेक्टर और प्रोफेशनल मोबिलिटी को शामिल किया गया है, इसलिए अब भारत के आईटी विशेषज्ञ, डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, टीचर्स, आर्किटेक्ट्स और अकाउंटेंट्स के लिए ओमान में काम करने और वहां अपनी सेवाएं देने के नियम आसान हो जाएंगे। इससे न केवल भारतीय प्रोफेशनल्स को अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलेगा, बल्कि देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह भी बढ़ेगा।
देखा जाए तो India-Oman के बीच हुआ यह समझौता केवल दो देशों के बीच टैक्स घटाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह बदलती हुई वैश्विक व्यवस्था में भारत की एक सोची-समझी और दूरदर्शी रणनीति का हिस्सा है। एक ऐसे समय में जब पूरी दुनिया युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन के टूटने से परेशान है, भारत ने एक ऐसे पुराने दोस्त का हाथ और मजबूती से थामा है जो हर मुश्किल वक्त में साथ खड़ा रहा है।
इस समझौते से जहां एक तरफ हमारे निर्यातकों को Oman के बाजार में सीधी और टैक्स-फ्री पहुंच मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ हमारे छोटे उद्योगों, किसानों और युवाओं के लिए भी प्रगति के नए रास्ते खुल रहे हैं। सुरक्षित व्यापार मार्ग और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह समझौता आने वाले समय में भारत की आर्थिक प्रगति की रफ्तार को बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभाने वाला है।
