India-Myanmar Ties: भारत और पड़ोसी देश म्याँमार के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को एक नई गति देने के लिए सोमवार को देश की राजधानी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में म्याँमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की मेजबानी की। विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बैठक की महत्ता को रेखांकित करते हुए इसे दोनों पड़ोसी देशों के बीच “मित्रता और आपसी सहयोग के बंधनों को और अधिक प्रगाढ़ करने वाला” बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और म्याँमार के राष्ट्रपति के बीच भारत-म्याँमार द्विपक्षीय संबंधों के सभी आयामों पर व्यापक और विस्तृत चर्चा हुई है।
PM @narendramodi held wide-ranging discussions with President U Min Aung Hlaing of Myanmar on further deepening India-Myanmar bilateral ties.
Anchored in the enduring historical and people-to-people relationship, both sides agreed to advance 🇮🇳-🇲🇲 partnership for peace,… pic.twitter.com/kYt5cPl7NE
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) June 1, 2026
व्यापार, कनेक्टिविटी और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने पर बनी सहमति
इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी क्षेत्र में शांति, प्रगति और समृद्धि की साझेदारी को निरंतर आगे बढ़ाने पर अपनी पूर्ण सहमति व्यक्त की। वार्ता के मुख्य एजेंडे में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार की गति को तेज करना, आर्थिक निवेश को बढ़ावा देना, सीमा पार कनेक्टिविटी (संपर्क) परियोजनाओं में तेजी लाना, विकास की रणनीतिक साझेदारी और क्षमता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। इसके अलावा, दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने वर्तमान क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने और आपसी सीमा प्रबंधन (Border Management) को और अधिक सुचारू व चाक-चौबंद करने के लिए मिलकर काम करने पर विशेष बल दिया।
‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों के तहत सहयोग की प्रतिबद्धता
वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारत के उस संकल्प को दोहराया जिसके तहत भारत, म्याँमार को एक बेहद भरोसेमंद पड़ोसी और एक विश्वसनीय रणनीतिक साझीदार के रूप में देखता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपनी सुप्रसिद्ध ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी पहले), ‘एक्ट ईस्ट’ और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए तैयार की गई ‘महासागर’ (MAHASAGAR) नीतियों के अनुरूप हमेशा म्याँमार का सबसे नजदीकी और संकट के समय में सबसे पहले मदद का हाथ आगे बढ़ाने वाला (फर्स्ट रेस्पॉन्डर) देश बना रहेगा। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने म्याँमार के भीतर आंतरिक शांति, स्थिरता और सार्थक संवाद स्थापित करने की प्रक्रियाओं के प्रति भारत के पूर्ण समर्थन को दोहराया और कहा कि भारत इसके लिए अपने संघीय शासन (Federal Governance) और आर्थिक विकास के समृद्ध अनुभवों को साझा करने के लिए हमेशा तत्पर है।
