फरीदाबाद में आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़: 2900 किलो विस्फोटक बरामद और दो डॉक्टरों समेत सात गिरफ्तार

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जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से नाकाम हुई बड़ी आतंकी साजिश

राजधानी दिल्ली के बिल्कुल नजदीक हरियाणा के फरीदाबाद से बरामद 2900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री ने पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो कश्मीरी डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद इस आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान डॉ. आदिल अहमद राथर और डॉ. मुज़म्मिल अहमद गनई के रूप में हुई है। इनमें से डॉ. मुज़म्मिल फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में बतौर डॉक्टर कार्यरत था। पुलिस को शुरुआती जांच में पता चला है कि यह आतंकी मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGuH) जैसे संगठनों से जुड़ा हुआ है।

जांच अधिकारियों के मुताबिक, फरीदाबाद में मिली विस्फोटक सामग्री से आईईडी (Improvised Explosive Device) तैयार की जानी थी। इसका मकसद दिल्ली-एनसीआर में किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देना था। जम्मू-कश्मीर पुलिस के एडीजीपी विजय कुमार ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दो डॉक्टर भी शामिल हैं।

गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी:

जांच में अब तक सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है:-

  1. आरिफ निसार दर साहिल, नौगाम, श्रीनगर
  2. यासिर-उल-आशरफ, नौगाम, श्रीनगर
  3. मकसूद अहमद दर शाहिद, नौगाम, श्रीनगर
  4. मौलवी इरफान अहमद, शोपियां
  5. जमीर अहमद आहंगर, वाकुरा, गांदरबल
  6. डॉ. मुजम्मिल अहमद गनाई , कोइल 
  7. डॉ. आदिल, वानपोरा, कुलगाम

फरीदाबाद में गिरफ्तार डॉ. मुज़म्मिल की निशानदेही पर पुलिस ने जब अल-फलाह यूनिवर्सिटी के नजदीक छापा मारा तो वहां से पुलिस को हथियारों और विस्फोटकों का जखीरा मिला। तलाशी के दौरान पुलिस ने एक स्विफ्ट कार बरामद की, जिसमें से क्रिंकोव असॉल्ट राइफल, तीन मैगजीन और 83 जिंदा कारतूस मिले। यही नहीं, कार से एक पिस्तौल, दो खाली कारतूस और दो अतिरिक्त मैगजीन भी बरामद की गईं।

इस कार का संबंध उसी महिला डॉक्टर से जोड़ा जा रहा है जो यूनिवर्सिटी में डॉ. मुज़म्मिल की सहयोगी थी। पुलिस फिलहाल उससे पूछताछ कर रही है। इसके बाद धौज इलाके में छापेमारी के दौरान पुलिस ने 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, 20 टाइमर, 20 बैटरी और बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सर्किट जब्त किए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह विस्फोटक सामग्री पिछले 15 दिनों में डॉ. मुज़म्मिल तक पहुंचाई गई थी। आतंकी नेटवर्क में इसे ‘सफेद पाउडर’ के नाम से कोड किया गया था।

फतेहपुर तगा गांव से 2563 किलो विस्फोटक मिला

धौज के बाद पुलिस की जांच फतेहपुर तगा गांव तक पहुंची, जहां एक घर से 2563 किलो संदिग्ध विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। यह घर डॉ. मुज़म्मिल ने एक मौलाना से किराए पर लिया था। मौलाना को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के धागे पाकिस्तान से जुड़े हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपी विदेशी आकाओं के संपर्क में थे और ऑनलाइन एन्क्रिप्टेड चैनलों के माध्यम से निर्देश प्राप्त कर रहे थे।

जांच में अब तक जिन हथियारों की बरामदगी हुई है, उनमें एके-47 राइफल, चीनी स्टार पिस्तौल, बेरेटा पिस्तौल और एके क्रिंकोव राइफल शामिल हैं। साथ ही, पुलिस ने बड़ी मात्रा में आईईडी बनाने के उपकरण, रसायन, तार, टाइमर और बैटरियां भी जब्त की हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को भी जांच में शामिल किया गया है ताकि इस मॉड्यूल के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को उजागर किया जा सके।

आतंकी नेटवर्क में डॉक्टरों की भूमिका ने बढ़ाई चिंता, शिक्षा संस्थानों में सतर्कता बढ़ी

डॉक्टरों जैसे शिक्षित पेशेवरों का आतंकवादी नेटवर्क से जुड़ना सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन गया है। डॉ. मुज़म्मिल और डॉ. आदिल दोनों ही मेडिकल पेशे से जुड़े थे और समाज में सम्मानजनक स्थान रखते थे, लेकिन जांच में सामने आया है कि वे कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर आतंकी गतिविधियों में शामिल हुए।

इस खुलासे के बाद देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी परिसर की सुरक्षा को भी कड़ा कर दिया गया है ताकि किसी तरह की सबूतों से छेड़छाड़ न हो सके। हरियाणा पुलिस आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता ने पुष्टि की है कि यह मामला इंटरस्टेट टेरर नेटवर्क से जुड़ा है और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां इसमें सक्रिय रूप से सहयोग कर रही हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की सख्त निगरानी

फरीदाबाद में 2900 किलो विस्फोटक की बरामदगी के बाद दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने बस अड्डों, मेट्रो स्टेशनों, सरकारी भवनों और प्रमुख प्रतिष्ठानों पर निगरानी बढ़ा दी है। यह आतंकी नेटवर्क न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक फैला हुआ था।

इस पूरी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि आतंकियों की रणनीति अब नई दिशा में जा रही है—जहां वे शिक्षित युवाओं को निशाना बना रहे हैं ताकि आतंकी गतिविधियों को तकनीकी और पेशेवर रूप से और अधिक घातक बनाया जा सके। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह सफलता केवल एक साजिश को नाकाम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि भारत की सुरक्षा प्रणाली अब पहले से कहीं अधिक सजग और सक्षम है।

यह भी पढ़े – गुजरात एटीएस की बड़ी कार्रवाई: तीन संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, आईएसआईएस और अल-कायदा मॉड्यूल से कनेक्शन बेनकाब

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