सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों से हटाए जाएं आवारा कुत्ते; नसबंदी के बाद शेल्टर होम में रखें

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देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और रेबीज के मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सार्वजनिक परिसरों से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाया जाए। इन कुत्तों की नसबंदी कर उन्हें तय किए गए शेल्टर होम में रखा जाए और दोबारा उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाए जहां से उन्हें पकड़ा गया था। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय बेंच ने यह आदेश देते हुए सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को तीन हफ्तों के भीतर स्थिति रिपोर्ट और हलफनामा दाखिल करने को कहा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों की होगी।

आदेश पूरे देश में लागू होगा

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा तीन महीने पहले दिया गया आदेश अब पूरे देश में लागू होगा। इन आदेशों में सभी नेशनल और स्टेट हाईवे से आवारा पशुओं को हटाने, 24 घंटे सक्रिय पेट्रोलिंग टीम तैनात करने और हेल्पलाइन नंबर जारी करने की बात कही गई थी। अदालत ने जोर देकर कहा कि सड़कों पर घूम रहे मवेशी और कुत्ते न केवल ट्रैफिक के लिए खतरनाक हैं बल्कि नागरिकों की जान के लिए भी जोखिम हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि सरकारी और निजी संस्थानों, जैसे – स्कूल, कॉलेज, खेल परिसर और अस्पताल — को दो हफ्तों में चिन्हित किया जाए जहां आवारा कुत्तों की मौजूदगी पाई जाती है। इन परिसरों को सुरक्षित बनाने के लिए वहां फेंसिंग और नियमित निगरानी की जाए।

यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में देश के कई हिस्सों से बच्चों और बुजुर्गों पर आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आई हैं।

नसबंदी और शेल्टर व्यवस्था पर जोर

अदालत ने स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी कराने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों — जैसे नगर निगम, नगर परिषद और ग्राम पंचायत की होगी। नसबंदी और टीकाकरण के बाद इन कुत्तों को तय किए गए डॉग शेल्टर में रखा जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी परिस्थिति में कुत्तों को उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा, क्योंकि ऐसा करने से इस अभियान का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।

SC ने स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया कि हर तीन महीने में कम से कम एक बार इन परिसरों का निरीक्षण किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वहां दोबारा आवारा कुत्ते न बसने लगें। रखरखाव के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी जरूरी बताई गई है। अदालत ने कहा कि यह पूरा अभियान मानवीय दृष्टिकोण से चलाया जाए, लेकिन साथ ही जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

कोर्ट ने लिया था संज्ञान

यह मामला दरअसल उस समय शुरू हुआ जब 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एक रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में दिल्ली और आसपास के इलाकों में कुत्तों के काटने और रेबीज के बढ़ते मामलों की जानकारी दी गई थी। इसके बाद 11 अगस्त को कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए थे कि सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में भेजा जाए और उन्हें वापस सड़कों पर न छोड़ा जाए।

अब इस आदेश का दायरा पूरे भारत में विस्तारित हो गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश जल्द से जल्द सार्वजनिक स्थलों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों की पहचान करें और उनके चारों ओर बाड़ लगाकर सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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