वाराणसी, 5 नवंबर 2025: आज शिव की नगरी काशी दीपों की रोशनी में जगमगा उठी है। देव दीपावली 2025 (Dev Deepawali 2025) का यह पावन पर्व हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा की रात मनाया जाता है। इसे “देवताओं की दीपावली” कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध कर देवताओं को मुक्ति दिलाई थी। उस विजय के उपलक्ष्य में देवताओं ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था, और तभी से यह परंपरा काशी में जीवंत बनी हुई है।
25 लाख दीपों से आलोकित होंगी काशी की घाटियाँ
हर साल की तरह इस वर्ष भी देव दीपावली 2025 पर काशी के घाटों पर 25 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जा रहे हैं। साथ ही घाटों को 21 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। जैसे-जैसे संध्या ढलेगी, गंगा के दोनों किनारे दीपों की कतारों से उज्ज्वल हो उठेंगे।
इस बार की भव्य गंगा आरती देश के वीर जवानों को समर्पित है। श्रद्धालु आरती के दौरान अमर जवान ज्योति जलाकर शहीदों को नमन करेंगे। इस आयोजन में आस्था और राष्ट्रभक्ति का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।
मां गंगा की आरती करेंगी 21 बटूक और 42 कन्याएं
देव दीपावली 2025 की विशेषता यह है कि 21 बटूक और 42 कन्याएं मिलकर मां गंगा की आरती करेंगी। इस अवसर पर शंखध्वनि और वेद-मंत्रों के उच्चारण से पूरा वातावरण गूंज उठेगा। गंगा की लहरों पर झिलमिलाते दीप श्रद्धा और शांति का सजीव प्रतीक बनेंगे।
यह भी पढ़ें: मथुरा के वृंदावन में हुआ श्रीकृष्ण राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर 2025 का समापन
दशाश्वमेध घाट बना आकर्षण का केंद्र
काशी के सभी घाट दीपों से सजे हैं, लेकिन सबसे भव्य दृश्य दशाश्वमेध घाट पर देखने को मिलेगा। यहां हजारों श्रद्धालु और पर्यटक एक साथ गंगा आरती में शामिल होंगे।
साथ ही अस्सी घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट और मणिकर्णिका घाट पर भी दीपों की जगमगाहट देखने योग्य होगी। जब गंगा के जल पर लाखों दीपों की लौ एक साथ टिमटिमाएगी, तब पूरा वाराणसी स्वर्गीय आभा में नहाया दिखाई देगा।
वीर जवानों के सम्मान में गूंजेगी काशी
इस वर्ष की देव दीपावली 2025 पूरी तरह देशभक्ति के रंग में रंगी हुई है। घाटों पर देशभक्ति गीतों की ध्वनि, दीपों की रेखाएं और अमर जवान ज्योति की लौ सब मिलकर वीर जवानों को श्रद्धांजलि देंगी। यह आयोजन यह संदेश देता है कि धर्म, संस्कृति और राष्ट्रप्रेम एक-दूसरे के पूरक हैं।
आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम
देव दीपावली 2025 केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का उत्सव है। श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद दीपदान करते हैं और जीवन में ज्ञान एवं शांति का प्रकाश फैलाने का संकल्प लेते हैं। इसी कारण यह पर्व काशी की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं
प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्गों का पालन करने और घाटों पर सावधानी बरतने की अपील की गई है। इसके अलावा, नाविकों को तय सीमा के भीतर नाव संचालन की अनुमति दी गई है ताकि श्रद्धालु गंगा के बीच से दीपों की अद्भुत झिलमिलाहट का आनंद ले सकें।
#DevDeepawali2025 #KashiNews #VaranasiGangaAarti #DDNewsUP #KashiGhat #Deshbhakti #KartikPurnima #IndianCulture #SpiritualIndia