कानपुर। उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में एक बड़ा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासन को हिला दिया है। कानपुर में तैनात रहे पुलिस उपाधीक्षक(सीओ)ऋषिकांत शुक्ला को आय से अधिक संपत्ति और अपराधी गिरोह से संबंध रखने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। विशेष जांच टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि ऋषिकांत शुक्ला के पास लगभग 100 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति है, जो उनके नाम, परिवारजनों और सहयोगियों के माध्यम से अर्जित की गई है। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि वे जेल में बंद अधिवक्ता अखिलेश दुबे के गिरोह से भी जुड़े हुए हैं, जो भाजपा नेता रवि सतीजा को झूठे दुष्कर्म के मामले में फंसाने का आरोप झेल रहा है। इस खुलासे के बाद कानपुर पुलिस महकमे में हलचल मच गई है और सतर्कता विभाग ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
कानपुर में पुलिस उपाधीक्षक ऋषिकांत शुक्ला पर आय से अधिक संपत्ति और अपराधी गिरोह से संबंध के आरोप, निलंबन की कार्रवाई-
मिली जानकारी के अनुसार ऋषिकांत शुक्ला ने अपनी नौकरी के दौरान कई स्थानों पर पदस्थ रहते हुए भारी मात्रा में संपत्ति अर्जित की। एसआईटी की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके पास कुल 12 स्थानों पर संपत्तियाँ पाई गईं, जिनकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग 92 करोड़ रुपये है, जबकि तीन अन्य संपत्तियों के दस्तावेज अभी अधूरे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि उनकी 11 दुकानें कानपुर के आर्यनगर इलाके में स्थित हैं, जो उनके करीबी सहयोगी देवेंद्र दुबे के नाम पर दर्ज हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि सभी संपत्तियाँ ऋषिकांत शुक्ला के पैन कार्ड से जुड़ी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे बेनामी निवेश के माध्यम से भारी संपत्ति के स्वामी बने हैं।
सतर्कता विभाग को तीन नवंबर को भेजे गए एक पत्र में सचिव जगदीश ने प्रमुख सचिव (सतर्कता) को सूचित किया है कि पुलिस आयुक्त कानपुर नगर की रिपोर्ट के आधार पर ऋषिकांत शुक्ला के खिलाफ सतर्कता जांच प्रारंभ की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। इस पत्र के बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से सीओ ऋषिकांत शुक्ला को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया है। जांच की जिम्मेदारी सतर्कता अधिष्ठान लखनऊ को दी गई है, जो अब उनके बैंक खातों, निवेशों और संपत्ति के स्रोतों की विस्तृत जांच करेगा।
निलंबित सीओ ने आरोपों को बेबुनियाद बताया-
वहीं, निलंबित सीओ ऋषिकांत शुक्ला ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि यह जांच कुछ लोगों की साजिश के तहत की जा रही है, जिनका उद्देश्य उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में ईमानदारी से सेवा की है और कभी किसी गलत गतिविधि में शामिल नहीं रहे। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि जांच में जो दस्तावेज मिले हैं, वे गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत करते हैं।
ऋषिकांत शुक्ला का पुलिस विभाग में लंबा करियर –
गौरतलब है कि ऋषिकांत शुक्ला वर्ष 1998 में पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे और कानपुर में लंबी अवधि तक सेवा दी। वर्ष 1998 से 2006 तक उन्होंने कानपुर नगर में प्रभारी निरीक्षक के रूप में काम किया और 2006 से 2009 तक भी वही पर उनकी तैनाती रही। पुलिस उपाधीक्षक पद पर प्रोन्नति मिलने के बाद उन्हें उन्नाव और मैनपुरी जिलों में पदस्थ किया गया। निलंबन से पूर्व वे मैनपुरी के भोगांव क्षेत्र में सीओ के रूप में कार्यरत थे।

इस पूरे प्रकरण ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार गहराता जा रहा है, जबकि सत्ताधारी दल के नेताओं ने पारदर्शी जांच की मांग की है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल विभाग की साख पर धब्बा होगा बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक विफलता के रूप में देखा जाएगा। कुछ अधिकारियों ने यह भी कहा कि संभव है कि यह मामला व्यक्तिगत दुश्मनी या पुरानी रंजिश का परिणाम हो, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, 100 करोड़ की संपत्ति के खुलासे ने भ्रष्टाचार की गंभीर चर्चा को जन्म दिया-
सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से वायरल हो रही है। ट्विटर (X) और फेसबुक पर लोग पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। कई उपयोगकर्ताओं ने लिखा कि यदि एक पुलिस अधिकारी के पास 100 करोड़ की संपत्ति पाई जाती है तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम का भ्रष्टाचार है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई उन ईमानदार अधिकारियों को निशाना बनाने का नया तरीका है जो सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाते हैं।
सतर्कता विभाग द्वारा ऋषिकांत शुक्ला के बैंक खातों और संपत्ति की जांच, आरोप सिद्ध होने पर विभागीय कार्रवाई –
वर्तमान में सतर्कता विभाग ने सीओ शुक्ला के सभी बैंक खातों और निवेशों की निगरानी शुरू कर दी है। उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि पता लगाया जा सके कि संपत्ति के वास्तविक स्रोत क्या हैं। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो उनके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई बल्कि आपराधिक मामला दर्ज होने की संभावना भी है।
कानपुर के सीओ ऋषिकांत शुक्ला का यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। यह केवल एक अधिकारी की कहानी नहीं बल्कि पुलिस विभाग की उस गहरी समस्या की ओर इशारा करता है, जहाँ कुछ लोग अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर कानून से ऊपर होने का भ्रम पाल लेते हैं। अब सबकी निगाहें सतर्कता विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि क्या वाकई यह मामला भ्रष्टाचार का है या किसी अंदरूनी साजिश का हिस्सा। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि यह घटना एक बार फिर पुलिस सेवा की पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
दिनांक 03.11.2025 को शासन से प्राप्त आदेश के अनुसार यह जानकारी प्राप्त हुई है कि पूर्व पुलिस आयुक्त की रिपोर्ट पर ऋषिकांत शुक्ला, जो यहां कई पदों पर नियुक्त रहे है, उनके विरुद्ध विजिलेन्स की जांच प्रारंभ कर दी गई है एवं उनका निलंबन किया गया है। कानपुर में एसआईटी की जांच में पाया… pic.twitter.com/VJg5qXAJG6
— POLICE COMMISSIONERATE KANPUR NAGAR (@kanpurnagarpol) November 4, 2025







