मुरादाबाद में मदरसे में छात्रा से वर्जिनिटी सर्टिफिकेट की मांग, एडमिशन इंचार्ज गिरफ्तार, मामला संवेदनशील, पुलिस जांच में जुटी

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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद के पाकबड़ा थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। आरोप है कि एक मदरसे में 13 वर्षीय छात्रा से एडमिशन के लिए “वर्जिनिटी सर्टिफिकेट” मांगा गया। यह मामला सामने आने के बाद पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस इसे बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए जांच में जुटी हुई है।

जानकारी के अनुसार, पीड़िता के पिता ने पुलिस में दी तहरीर में बताया कि उनकी बेटी पाकबड़ा स्थित दरसा जामिया असहनुल बनात इंटर कॉलेज में पढ़ती थी। वर्ष 2024 में छात्रा का सातवीं कक्षा में दाखिला कराया गया था, जिसके लिए ₹35,000 की फीस जमा की गई थी। परिवारिक कारणों से पिता कुछ समय के लिए अपनी बेटी को लेकर चंडीगढ़ चले गए थे। अगस्त में जब मां बेटी को वापस मदरसे में एडमिशन दिलाने गईं, तो वहां उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया गया।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि मदरसे की प्रधानाचार्या रहनुमा और एडमिशन सेल इंचार्ज मोहम्मद शाहजहां ने छात्रा को एडमिशन देने से पहले “मेडिकल टेस्ट और वर्जिनिटी सर्टिफिकेट” लाने की शर्त रख दी। यह सुनकर परिवार दंग रह गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस मांग का विरोध किया तो स्टाफ ने उन्हें टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) कटवाने का दबाव बनाया और ₹500 शुल्क भी वसूला, लेकिन बाद में टीसी देने से साफ इंकार कर दिया गया। इससे छात्रा का किसी अन्य स्कूल में एडमिशन भी रुक गया और उसकी पढ़ाई ठप हो गई।

पीड़िता के पिता ने इस घटना की लिखित शिकायत पाकबड़ा थाना पुलिस से की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रधानाचार्या रहनुमा, एडमिशन इंचार्ज मोहम्मद शाहजहां और अन्य स्टाफ के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 354 (महिला की मर्यादा भंग करने का प्रयास), 506 (धमकी देना) और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि मामला बेहद संवेदनशील है और इसे प्राथमिकता के आधार पर जांचा जा रहा है। पुलिस ने आरोपी एडमिशन इंचार्ज मोहम्मद शाहजहां को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है जो मदरसे के प्रशासनिक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है।

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गुस्सा और आक्रोश है। लोगों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों में इस तरह की शर्मनाक हरकत समाज के लिए कलंक हैं और इससे शिक्षा के पवित्र स्थानों की गरिमा पर सवाल उठता है। कई सामाजिक संगठनों ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि किसी भी नाबालिग छात्रा से वर्जिनिटी सर्टिफिकेट जैसी मांग न केवल कानूनन गलत है बल्कि यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और गरिमा पर गहरा आघात करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं बाल शिक्षा और महिला सुरक्षा को लेकर समाज में फैली विकृत सोच को उजागर करती हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल छात्रा और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान की गई है। बाल कल्याण समिति (CWC) को भी इस मामले की जानकारी दे दी गई है ताकि छात्रा को मनोवैज्ञानिक सहायता मिल सके।

इस घटना के सामने आने के बाद प्रशासन ने जिले के सभी मदरसों के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि भविष्य में किसी छात्र या छात्रा के साथ इस तरह का अनुचित व्यवहार न हो।

यह मामला न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि समाज में आज भी कुछ संस्थान धार्मिक शिक्षा के नाम पर बच्चों की गरिमा और अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और दोषियों को क्या सजा मिलती है।

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