Bihar Politics: जोकीहाट में 3 पूर्व मंत्री आमने-सामने, AIMIM के किले में पड़ी दरार से बढ़ी सियासी सरगर्मी
अररिया। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सीमांचल की सबसे चर्चित सीट जोकीहाट इस बार पूरे प्रदेश की सुर्खियों में है। यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है क्योंकि तीन पूर्व मंत्री आमने-सामने हैं। साथ ही, AIMIM के मजबूत गढ़ में भी अब दरारें पड़ती दिख रही हैं।
इस सीट पर मुकाबला राजद, जनसुराज, जदयू और AIMIM प्रत्याशियों के बीच कड़ा होता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार जीत-हार का अंतर बेहद कम रह सकता है।
कभी जोकीहाट की राजनीति सीमांचल गांधी कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. तस्लीमुद्दीन के ईर्द-गिर्द घूमती थी। आज उन्हीं की राजनीतिक विरासत को उनके दो बेटे—शाहनवाज आलम और सरफराज आलम—आमने-सामने होकर चुनौती दे रहे हैं।
राजद ने इस बार सिटिंग विधायक सह पूर्व मंत्री शाहनवाज आलम पर भरोसा जताया है, जबकि जनसुराज पार्टी से उनके बड़े भाई और पूर्व सांसद सह पूर्व मंत्री सरफराज आलम मैदान में हैं। इसके अलावा जदयू से पूर्व मंत्री मंजर आलम और AIMIM से मुर्शीद आलम भी चुनावी रण में हैं।
पिछले चुनाव में शाहनवाज आलम ने AIMIM के टिकट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन बाद में वे राजद में शामिल हो गए। इस बार AIMIM में टिकट वितरण को लेकर असंतोष गहराया है। पार्टी के प्रभावशाली नेता अब्दुल्लाह सलीम चतुर्वेदी के बगावती रुख से मीम के किले में दरार स्पष्ट दिख रही है।
जोकीहाट सीट की सामाजिक बनावट की बात करें तो यह मुस्लिम बाहुल्य इलाका है। यहां लगभग 65 प्रतिशत मुस्लिम और 35 प्रतिशत हिंदू मतदाता हैं, जिनमें पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अन्य समुदायों की भी अहम भूमिका है।
इस सीट का राजनीतिक इतिहास भी काफी रोचक रहा है। जोकीहाट में 1967 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ था और अब तक 16 बार यहां मतदान हो चुका है। इनमें स्व. तस्लीमुद्दीन और उनके परिवार का वर्चस्व सबसे मजबूत रहा है। वे कांग्रेस (1969), निर्दलीय (1972), जनता पार्टी (1977, 1985) और समाजवादी पार्टी (1995) से जीत चुके हैं।
उनके बेटे सरफराज आलम ने 1996 में जनता दल, 2000 में राजद, 2010 और 2015 में जदयू के टिकट पर जीत हासिल की। हालांकि 2020 के चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ जब सरफराज को उनके छोटे भाई शाहनवाज आलम ने एआईएमआईएम के टिकट पर हरा दिया। शाहनवाज ने तब 7,383 वोटों से जीत दर्ज की थी और बाद में राजद में शामिल हो गए।
इतिहास बताता है कि इस सीट पर जदयू चार बार, जबकि कांग्रेस, जनता पार्टी, राजद और निर्दलीय प्रत्याशी दो-दो बार विजयी रहे हैं। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, समाजवादी पार्टी, जनता दल और AIMIM ने एक-एक बार जीत दर्ज की है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार जोकीहाट का चुनाव केवल सीट की नहीं, बल्कि तस्लीमुद्दीन परिवार की राजनीतिक विरासत की परीक्षा भी साबित होगा।
