UP Census 2027: भारत के इतिहास में पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से आयोजित की जा रही जनगणना 2027 (Census 2027) को लेकर उत्तर प्रदेश से एक बड़ा और महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राज्य में नागरिकों को खुद ऑनलाइन अपनी जानकारी दर्ज करने के लिए दी गई ‘सेल्फ-एन्युमरेशन’ (Self-Enumeration/स्व-गणना) की समय-सीमा आज समाप्त हो गई है। उत्तर प्रदेश के लगभग 40 लाख परिवारों ने इस नई डिजिटल सुविधा का उपयोग करते हुए अपनी आवासीय व पारिवारिक जानकारियां खुद ऑनलाइन सबमिट की हैं।
उत्तर प्रदेश की जनगणना परिचालन और नागरिक पंजीकरण निदेशक शीतल वर्मा ने इस पूरी प्रक्रिया के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि शहरी क्षेत्रों की कुछ आशंकाओं के बावजूद प्रदेश के कई जिलों में इस डिजिटल पहल को लेकर बेहद मजबूत और सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
क्या है ‘सेल्फ-एन्युमरेशन’ की प्रक्रिया और इसके बाद का कदम?
देश की इस सबसे बड़ी जनसांख्यिकीय कसरत (Demographic Exercise) को आसान बनाने के लिए सरकार ने पहली बार यह तकनीक आधारित विकल्प दिया था:
-
ऑनलाइन विकल्प: नागरिकों के लिए स्व-गणना की यह ऑनलाइन विंडो 7 मई से 21 मई तक खुली रखी गई थी। इसमें निवासियों ने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से आवास की स्थिति और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कुल 34 सवालों के जवाब खुद दर्ज किए।
-
11-अंकों की आईडी: फॉर्म सबमिट करने के बाद प्रत्येक परिवार के लिए 11-अंकों की एक अल्फान्यूमेरिक आईडी (Alphanumeric ID) जनरेट हुई है। अब जब प्रगणक (Enumerator) उनके घर भौतिक सत्यापन के लिए आएंगे, तो नागरिकों को केवल यह आईडी दिखानी होगी और उनका डेटा तुरंत सत्यापित हो जाएगा।
22 मई से शुरू होगा पहला चरण: हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन
निदेशक शीतल वर्मा ने बताया कि जनगणना 2027 का पहला चरण, जिसे हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (House Listing Operations) कहा जाता है, उत्तर प्रदेश में कल 22 मई से शुरू होकर 20 जून तक संचालित किया जाएगा।
-
विशाल नेटवर्क: इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश में लगभग 5.5 लाख कर्मियों (प्रगणकों और पर्यवेक्षकों) को तैनात किया गया है। इन सभी को मल्टी-लेवल डिजिटल ट्रेनिंग सिस्टम के जरिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
-
ऑफलाइन मोबाइल ऐप: क्षेत्र में डेटा संग्रह का काम एक विशेष ‘ऑफलाइन मोबाइल एप्लिकेशन’ के माध्यम से किया जाएगा, जो केंद्रीय सर्वर के साथ सिंक (Sync) होते ही रीयल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग को सक्षम बनाएगा।
-
दूसरा चरण: जनगणना का दूसरा चरण, जिसमें व्यक्तिगत जनसंख्या गणना और जातिगत डेटा (Caste Data) का संग्रह किया जाएगा, वह फरवरी 2027 में निर्धारित है।
यह भी पढ़े: Deoria को बड़ी सौगात: 22 मई को सीएम योगी रखेंगे देवरिया-कसया फोरलेन की आधारशिला
इन जिलों में मिला बंपर रिस्पॉन्स; NCR के शहरी क्षेत्र पीछे
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी जिलों ने तकनीक को अपनाने में बाजी मारी है:
-
अग्रणी जिले: औरैया, सोनभद्र, मुरादाबाद और पीलीभीत जैसे जिलों में डिजिटल स्व-गणना को लेकर बेहतरीन प्रतिक्रिया मिली। कुछ क्षेत्रों में तो लगभग आधे परिवारों ने ऑनलाइन माध्यम को चुना।
-
NCR और शहरी क्षेत्रों में कमी: दिल्ली-एनसीआर से जुड़े शहरी जिलों और महानगरों में भागीदारी का ग्राफ तुलनात्मक रूप से काफी नीचे रहा। इसका मुख्य कारण शहरी निवासियों की व्यस्तता, प्रगणकों के दौरे के समय घर पर अनुपलब्धता या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने को लेकर मन में बैठी कुछ आशंकाएं रहीं।
UP Census 2027 में डेटा पूरी तरह सुरक्षित
शहरी क्षेत्रों में डेटा की प्राइवेसी (Privacy) और सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर निदेशक शीतल वर्मा ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की।
गोपनीयता की गारंटी: “जनगणना के तहत जुटाई गई नागरिकों की सभी जानकारियां ‘जनगणना अधिनियम’ (Census Act) के तहत पूरी तरह कानूनी रूप से सुरक्षित हैं। व्यक्तिगत स्तर के डेटा को कभी भी किसी के साथ साझा नहीं किया जाता है, यहाँ तक कि विभिन्न सरकारी विभागों के बीच भी इसे ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। हम केवल सांख्यिकीय संख्याएं (Statistical Numbers) जारी करते हैं, किसी परिवार की विशिष्ट व्यक्तिगत जानकारी को कोई भी सरकारी एजेंसी एक्सेस नहीं कर सकती।”
पिछली जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में लगभग पांच करोड़ परिवार थे। इस बार डिजिटल टूल्स की मदद से राज्य प्रशासन का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र और अंतिम व्यक्ति तक शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित करना है।







