लखनऊ। राजधानी के शिया कॉलेज में आज ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी बैठक में उस वक्त माहौल खास हो गया जब मौलाना सैयद साएम मेंहदी नकवी को दोबारा सर्वसम्मति से बोर्ड का अध्यक्ष चुन लिया गया। शिया समाज से जुड़े दर्जनों प्रतिनिधि और उलेमा मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता मौलाना साएम मेंहदी ने की, जबकि मुख्य वक्ता के तौर पर मौलाना यासूब अब्बास ने अपनी बेबाक राय रखी।
बैठक में वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, शिया मुसलमानों की सामाजिक स्थिति और सरकार से उनके हक से जुड़ी कई अहम बातें उठाई गईं। मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि जिस तरह सरकार ने मुस्लिम समाज की स्थिति पर सच्चर कमेटी बनाई थी, उसी तरह अब शिया समाज की स्थिति को समझने और उनके अधिकार सुनिश्चित करने के लिए अलग कमेटी बननी चाहिए।
उन्होंने कहा, “शिया मुसलमानों की आबादी देशभर में लाखों की संख्या में है, लेकिन न तो उनकी स्थिति पर कोई ठोस रिपोर्ट आई है और न ही उनके शैक्षणिक या सामाजिक उत्थान की दिशा में सरकार ने गंभीरता दिखाई है। अब वक्त आ गया है कि शिया समाज को भी उसका हक मिले।”
बैठक में मौलाना यासूब अब्बास ने वक्फ संपत्तियों पर बढ़ते अतिक्रमण और दखल के मामलों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को जल्द वापस लिया जाए, क्योंकि इससे वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता पर खतरा पैदा हो गया है।
सदस्यों ने एक सुर में कहा कि वक्फ संपत्तियों पर हो रहे कब्जों और दुरुपयोग पर सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे। साथ ही बोर्ड ने साफ कहा कि शिया समाज की भागीदारी बिना किसी राजनीतिक रंग के तय होनी चाहिए, ताकि धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं अपनी असली भूमिका निभा सकें।
बैठक के अंत में मौलाना साएम मेंहदी नकवी को दोबारा अध्यक्ष चुने जाने पर सभी ने बधाई दी और कहा कि उनके नेतृत्व में शिया समाज के मुद्दे मजबूती से उठाए जाएंगे। इस निर्णय की औपचारिक घोषणा आगामी वार्षिक अधिवेशन में की जाएगी।