Narcotics Control Bureau: देश को नशा मुक्त बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही केंद्र की मोदी सरकार और देश की सुरक्षा एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे अनोखी और बड़ी कामयाबी मिली है। Narcotics Control Bureau (NCB) ने एक गुप्त और बड़े सैन्य-स्तर के अभियान ‘ऑपरेशन रेजपिल’ (Operation Ragepill) के तहत भारत के इतिहास में पहली बार ‘कैप्टागन’ (Captagon) नामक प्रतिबंधित सिंथेटिक ड्रग की एक विशाल खेप जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस पकड़ी गई खेप की अनुमानित कीमत ₹182 करोड़ आंकी गई है।
वैश्विक स्तर पर इस खतरनाक सिंथेटिक उत्तेजक ड्रग को “जिहादी ड्रग” (Jihadi Drug) के नाम से जाना जाता है, क्योंकि पश्चिम एशिया के युद्धग्रस्त और अशांत इलाकों में सक्रिय आतंकी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्कों द्वारा इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और व्यापार किया जाता है।
गृह मंत्री अमित शाह का एलान: ‘ड्रग तस्करी पर जीरो टॉलरेंस, हर एक ग्राम का हिसाब होगा’
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (ट्विटर) पर इस ऐतिहासिक सफलता की आधिकारिक घोषणा की। गृह मंत्री ने इसे मोदी सरकार के ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ अभियान की दिशा में एक युगांतकारी मील का पत्थर बताया।
Modi govt is resolved for a ‘Drug-Free India’.
Glad to share that through ‘Operation RAGEPILL’, our agencies have achieved the first-ever seizure of Captagon, the so-called “Jihadi Drug”, worth ₹182 crore.
The busting of the drug consignment destined for the Middle East and…
— Amit Shah (@AmitShah) May 16, 2026
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच में यह सामने आया है कि ड्रग्स की यह खेप भारत से होते हुए मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) के देशों में भेजी जानी थी। सुरक्षा एजेंसियों ने इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए एक विदेशी नागरिक को भी रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। शाह ने दोहराया कि भारत की धरती का इस्तेमाल ट्रांजिट रूट के तौर पर करने वाले हर एक ड्रग तस्कर को नेस्तनाबूद किया जाएगा।
क्या है ‘जिहादी ड्रग’ कैप्टागन (Captagon)?
कैप्टागन एक अत्यंत प्रतिबंधित और खतरनाक एम्फ़ैटेमिन-आधारित सिंथेटिक उत्तेजक ड्रग है। अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम एशिया (विशेषकर सीरिया और लेबनान के संघर्ष क्षेत्रों) में आतंकी संगठन अपने लड़ाकों को युद्ध के मैदान में लंबे समय तक बिना थके, बिना डरे और होश खोकर बर्बरता से लड़ने के लिए यह टैबलेट्स देते हैं। यही कारण है कि इसे वैश्विक मीडिया में ‘जिहादी ड्रग’ का नाम मिला है। हाल के दिनों में मैरीटाइम (समुद्री) और एयर कार्गो रूट के जरिए अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट भारत को इसके ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल करने की फिराक में थे, जिसे एनसीबी ने नाकाम कर दिया।
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Narcotics Control Bureau का बैक-टू-बैक बड़े एक्शन
‘ऑपरेशन रेजपिल’ कोई इकलौती सफलता नहीं है। गृह मंत्रालय के सीधे मार्गदर्शन में एनसीबी पिछले कुछ महीनों से देश के समुद्री तटों और हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय तस्करों काल बनी हुई है:
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मुंबई में ₹1745 करोड़ की कोकीन: इसी महीने की शुरुआत में एनसीबी ने मुंबई में एक विशाल अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पीछा करते हुए 349 किलोग्राम हाई-ग्रेड कोकीन जब्त की थी, जिसकी बाजार में कीमत ₹1,745 करोड़ थी।
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कूरियर सिंडिकेट का भंडाफोड़: एक अन्य हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन में मुंबई में ही अंतरराष्ट्रीय कूरियर चैनलों के जरिए विदेशों से मंगाई जा रही हाई-ग्रेड कोकीन, गांजा और कैनबिस गमीज़ बरामद की गईं, जिसकी कीमत करीब ₹200 करोड़ थी।
नशा माफियाओं पर कसता शिकंजा
केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 से लेकर अब तक एंटी-नारकोटिक्स अभियानों में अभूतपूर्व तेजी आई है:
| विवरण | वर्ष 2025 से अब तक के आंकड़े |
| कुल जब्त मादक पदार्थ | 1.33 लाख किलोग्राम से अधिक |
| जब्त ड्रग्स की कुल कीमत | लगभग ₹1,980 करोड़ |
| दर्ज किए गए कुल मामले | 447 राष्ट्रीय मामले |
| गिरफ्तार किए गए बड़े तस्कर | 994 (जिसमें 25 विदेशी नागरिक शामिल) |
मिशन 2047: भारत को पूरी तरह ड्रग-फ्री बनाने का रोडमैप तैयार
शुक्रवार को ही एक राष्ट्रीय एंटी-नारकोटिक्स कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने देश के सामने सरकार का विज़न रखा था। उन्होंने बताया कि सरकार ने साल 2047 तक भारत को पूरी तरह ड्रग्स मुक्त बनाने का एक व्यापक और बहु-आयामी रोडमैप तैयार किया है। इस रणनीति के तहत राज्यों की पुलिस, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और एनसीबी के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग की जा रही है, ताकि भारत की सीमाओं के भीतर ड्रग्स की एक खेप तो दूर, एक ग्राम नशा भी प्रवेश न कर सके।







