AIIMS नई दिल्ली: देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है। संस्थान ने भारत का पहला पोर्टेबल बेडसाइड एमआरआई (MRI) सिस्टम शुरू कर दिया है। इस अत्याधुनिक तकनीक के शुरू होने से गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए ब्रेन इमेजिंग करना अब न केवल आसान, बल्कि अत्यधिक तेज और सुरक्षित हो गया है।
बेडसाइड स्कैनिंग से मरीजों को मिली बड़ी राहत
इस पोर्टेबल MRI मशीन की सबसे बड़ी और अनूठी खासियत यह है कि इसके लिए मरीजों को अपनी जगह से हिलाने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि इसे सीधे मरीज के बेड तक ले जाया जा सकता है।
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पारंपरिक प्रणाली से भिन्नता: पारंपरिक MRI स्कैन में गंभीर मरीजों को वार्ड से निकालकर विशेष इमेजिंग कक्ष तक ले जाना पड़ता था, जिसमें काफी समय, तकनीकी तैयारी और अतिरिक्त जनशक्ति की आवश्यकता होती थी।
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सुविधा का व्यापक विस्तार: AIIMS की यह नई प्रणाली ICU (गहन चिकित्सा इकाई), इमरजेंसी और न्यूरोसर्जरी वार्ड के भीतर ही स्कैनिंग की सुविधा प्रदान करती है।
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जोखिम में भारी कमी: मशीन को मरीज के पास ले जाने की सुविधा होने के कारण गंभीर मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर करने के दौरान होने वाले स्वास्थ्य संबंधी जोखिम काफी कम हो गए हैं।
न्यूरोलॉजी सेंटर में शुरू हुआ सफल इस्तेमाल
AIIMS के सेंटर फॉर न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस में इस तकनीक का उपयोग पहले ही शुरू हो चुका है और चिकित्सा विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम डॉ. शैलेश गायकवाड़ के नेतृत्व में मरीजों की जांच कर रही है। डॉक्टरों के अनुसार, यह तकनीक निम्नलिखित चिकित्सा स्थितियों में बेहद कारगर सिद्ध हो रही है:
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स्ट्रोक के मामलों की त्वरित जांच: मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह और क्षति का तुरंत पता लगाने में।
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सिर की चोट का आकलन: अचानक लगी चोटों की गंभीरता को मापने के लिए।
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ICU के मरीजों की मॉनिटरिंग: जो मरीज वेंटिलेटर या अन्य गंभीर जीवन रक्षक प्रणालियों पर हैं, उनकी लगातार निगरानी के लिए।
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बच्चों के चिकित्सा मामले: बाल चिकित्सा (Pediatric) के मरीजों को बिना किसी एनेस्थीसिया के जांच की सुविधा देने के लिए।
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सर्जरी के बाद की देखभाल: ऑपरेशन के बाद मस्तिष्क की स्थिति पर नजर रखने में।
अल्ट्रा-लो-फील्ड तकनीक और इसकी कार्यप्रणाली
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पोर्टेबल MRI सिस्टम अल्ट्रा-लो-फील्ड (Ultra-Low-Field) तकनीक पर आधारित है। यह आपात स्थितियों में डॉक्टरों को तेजी से और सटीक निर्णय लेने में सक्षम बनाता है, खासकर उन परिस्थितियों में जब पारंपरिक इमेजिंग कराना कठिन या मरीज के लिए जोखिम भरा होता है। AIIMS की इस महत्वपूर्ण पहल को सभी आवश्यक नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद लागू किया गया है, जिसमें ‘Radiosurgery Global’ का तकनीकी सहयोग भी शामिल है।
भारतीय स्वास्थ्य तंत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, AIIMS की यह पहल न केवल देशभर में ब्रेन इमेजिंग की पहुंच बढ़ाने में मददगार साबित होगी, बल्कि पॉइंट-ऑफ-केयर न्यूरोडायग्नोस्टिक्स के क्षेत्र में होने वाले शोध को भी एक नई और सशक्त दिशा देगी। इसे भारत के स्वास्थ्य तंत्र को अधिक आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में एक बहुत ही अहम उपलब्धि माना जा रहा है। आने वाले समय में इसके उपयोग को अन्य प्रमुख अस्पतालों तक भी विस्तारित करने की योजना पर विचार किया जा सकता है।
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