west Bengal Election 2026 की मतगणना से ठीक पहले एक बड़ा राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। west Bengal विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने west Bengal के पिंगला और दासपुर विधानसभा क्षेत्रों में West Bengal चुनाव की मतगणना के दिन संविदा कर्मचारियों (Contractual Staff) की ड्यूटी पर तैनाती को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। सुवेंदु अधिकारी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर जनादेश के साथ छेड़छाड़ करने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है और पूरे मामले में चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सुवेंदु अधिकारी ने न केवल इस नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी चेतावनी दी है कि यदि चुनाव आयोग ने इस मामले में तुरंत कदम नहीं उठाया, तो West Bengal मे यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।
क्या है पूरा मामला और सुवेंदु अधिकारी की आपत्ति?
सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और चुनाव आयोग को लिखे गए अपने आधिकारिक पत्र के माध्यम से पिंगला (227-Pingla AC) और दासपुर (230-Daspur AC) विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना कार्यों के लिए जारी किए गए आदेशों को लेकर हैरानी जताई है। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इन आदेशों में बड़ी संख्या में अस्थायी और संविदा कर्मचारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
अपने कड़े शब्दों में लिखे गए पत्र में सुवेंदु अधिकारी ने पूछा:
“क्या लोकतंत्र का भविष्य संविदा कर्मचारियों के हाथों में सौंपा जा रहा है? यह एक अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता पर सीधा हमला है।”
West Bengal मे बीजेपी नेता ने मतदान की गिनती के लिए ‘जिबिका सेवकों’, ‘सहायकों’ और संविदात्मक मतदान अधिकारियों की तैनाती पर कड़ा ऐतराज़ जताया है। उन्होंने कहा कि अस्थायी कर्मचारियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो सकता है, क्योंकि उनकी आजीविका और नौकरी की निरंतरता राज्य सरकार और सत्ताधारी दल की इच्छाओं पर निर्भर करती है।
किन कर्मचारियों की नियुक्ति पर उठे हैं सवाल?
सुवेंदु अधिकारी ने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए कुछ विशेष उदाहरणों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि पिंगला विधानसभा क्षेत्र (227) के मतगणना दलों में संविदा कर्मचारियों को शामिल किया गया है, जिनमें निम्नलिखित नाम प्रमुख हैं:
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बिपालेंदु बेरा (जेएस – JS)
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शंकर पहाड़ी (जेएस – JS)
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नबा कुमार अपिक (बीएलएस – BLS)
अधिकारी ने यह भी बताया कि ‘रिजर्व टैगिंग’ जैसी बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रक्रियाओं में भी बीएलए (BLA) जैसे संविदा कर्मचारियों को लगाया गया है। इसके अलावा, ईवीएम के मूवमेंट और उनकी सीलिंग जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भी सहायकों, वीएलई (VLE) और संविदा पर नियुक्त डीईओ (DEO) की तैनाती की गई है। अधिकारी ने कहा कि इस प्रकार की नियुक्तियां प्रशासनिक निष्पक्षता को संदिग्ध बनाती हैं।
ईवीएम, वीवीपीएटी और मतगणना की संवेदनशीलता
भारतीय चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, ईवीएम (EVM), वीवीपीएटी (VVPAT) और डाक मतपत्रों (Postal Ballots) को संभालना और उनकी गिनती करना बेहद संवेदनशील कार्य है। इन कार्यों के लिए उच्च स्तर की प्रशासनिक स्वतंत्रता और गोपनीयता की आवश्यकता होती है।
सुवेंदु अधिकारी ने सवाल उठाया कि इस तरह के संवेदनशील कार्यों की जिम्मेदारी उन लोगों को कैसे सौंपी जा सकती है जो स्थायी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं? अधिकारी के अनुसार:
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राजनीतिक दबाव की संभावना: अस्थायी और संविदा कर्मचारियों पर स्थानीय राजनीतिक दबाव पड़ने की संभावना अधिक होती है, जिससे मतगणना के परिणामों की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
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पारदर्शिता का अभाव: ईवीएम के सीलिंग और मूवमेंट जैसे कार्य केवल नियमित और स्थायी सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति में ही होने चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की धांधली की गुंजाइश न बचे।
चुनाव आयोग से की गई मांग और निष्पक्षता पर जोर
सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और west Bengal के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को संबोधित करते हुए एक स्पष्ट मांग रखी है। उन्होंने कहा कि 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले इन आदेशों में तुरंत संशोधन किया जाना चाहिए।
उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
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नियमित कर्मचारियों की तैनाती: मतगणना प्रक्रिया में केवल स्थायी और नियमित सरकारी कर्मचारियों को ही शामिल किया जाए।
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संविदा कर्मचारियों को अलग रखना: संवेदनशील पदों से संविदा और अस्थायी कर्मचारियों को तत्काल हटाया जाए।
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लोकतंत्र का संविदाकरण रोकना: चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनादेश की पवित्रता किसी भी बाहरी दबाव या राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल न हो।
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि बीजेपी जनता के जनादेश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और वे किसी भी ऐसे व्यक्ति को मतगणना प्रक्रिया के पास नहीं फटकने देंगे, जिनकी नौकरियां सत्ताधारी दल की मनमानी पर निर्भर करती हैं।
राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाएं
West Bengal के पिंगला और दासपुर निर्वाचन क्षेत्रों में हुए इस विवाद के बाद west Bengal के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां बीजेपी इसे टीएमसी की एक सोची-समझी साजिश बता रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती मान रहे हैं। मतगणना के दिन निष्पक्षता बनाए रखना चुनाव आयोग की प्राथमिकता होती है, और इस प्रकार के आरोपों पर आयोग का रुख क्या होगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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