Lucknow AI City: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अब सिर्फ नवाबों के शहर और कबाबों के लिए ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी के केंद्र के रूप में भी जानी जाएगी। हाल ही में शहर के विकास को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला लिया गया है, जो आने वाले समय में लखनऊ की सूरत बदल सकता है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने अपनी ताजा बैठक में शहर को स्मार्ट बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर खास फोकस किया गया है।
वृंदावन योजना में हाई-टेक हब की तैयारी
इस पूरी हलचल का सबसे मुख्य केंद्र है लखनऊ की वृंदावन योजना। परिषद की 275वीं बोर्ड बैठक में यह तय किया गया है कि वृंदावन योजना के सेक्टर-15 में एक शानदार ‘AI सिटी’ विकसित की जाएगी। यह सिर्फ एक रिहायशी इलाका नहीं होगा, बल्कि एक बिजनेस पार्क की तरह काम करेगा। लगभग 12 एकड़ में फैली इस Lucknow AI City परियोजना पर करीब 368 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है।
खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए सरकार अकेले काम नहीं करेगी, बल्कि यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित होगी। इसके लिए आवास विकास और यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के बीच हाथ भी मिला लिया गया है। इस कदम से न केवल शहर में स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आईटी के क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं को अपने ही शहर में बड़े मौके मिलेंगे।

परिषद का नया बजट और खर्च का पूरा गणित
किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए पैसे की जरूरत होती है, और इसके लिए उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद बजट में अच्छी-खासी रकम तय की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 4173.66 करोड़ रुपये के बजट को हरी झंडी मिली है। प्रमुख सचिव आवास पी. गुरु प्रसाद की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आय और खर्च का पूरा खाका खींचा गया।
आवास विकास परिषद को उम्मीद है कि संपत्तियों की बिक्री से उसे करीब 2004 करोड़ रुपये की कमाई होगी। वहीं, खर्च की बात करें तो सबसे ज्यादा जोर नई जमीनों को खरीदने पर है, जिसके लिए लगभग 1927 करोड़ रुपये रखे गए हैं। निर्माण और विकास कार्यों के लिए भी 702 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान है। यानी आने वाले समय में लखनऊ के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों में भी काफी निर्माण कार्य देखने को मिलेंगे।

अयोध्या और अन्य शहरों पर विशेष ध्यान
इस यूपी आवास विकास बोर्ड बैठक में सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि धार्मिक नगरी अयोध्या के लिए भी खजाना खोला गया है। अयोध्या की विकास परियोजनाओं के लिए अलग से 1037.89 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। इसके अलावा वाराणसी और मऊ जैसे शहरों में भी नई आवासीय योजनाओं को मंजूरी दी गई है, ताकि वहां के लोगों को भी बेहतर आवास की सुविधा मिल सके।
हालांकि, उन लोगों के लिए थोड़ी निराशा वाली खबर है जो फ्लैट की कीमतों में कमी का इंतजार कर रहे थे। प्रदेश भर में खाली पड़े करीब 9,000 फ्लैटों के दामों में 15 प्रतिशत की छूट देने का जो प्रस्ताव था, उसे बोर्ड ने फिलहाल टाल दिया है। अधिकारियों ने इस पर एक नई और विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, अब वृंदावन और अवध विहार जैसी विकसित कॉलोनियों में जमीन के रेट डीएम सर्किल रेट के बराबर होंगे।
देखें तो वृंदावन योजना एआई सिटी की खबर लखनऊ के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। टेक्नोलॉजी और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का यह संगम आने वाले समय में शहर को डिजिटल इंडिया के मैप पर और मजबूती से स्थापित करेगा। हालांकि, आवासीय दरों में बढ़त और फ्लैटों पर छूट न मिलना आम आदमी की जेब पर थोड़ा असर जरूर डाल सकता है, लेकिन विकास की इस रफ्तार से भविष्य में रोजगार और निवेश के जो अवसर खुलेंगे, उनका फायदा पूरे प्रदेश को होगा।







