Pilibhit के बासमती चावल की खुशबू अब दुनिया के कई देशों में महकेगी, केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने की बड़ी घोषणा

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Pilibhit के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक बहुत अच्छी खबर सामने आई है। अब पीलीभीत की पहचान सिर्फ उसके जंगलों या बांसुरी से ही नहीं, बल्कि यहाँ के खुशबूदार बासमती चावल से भी होगी। केंद्रीय राज्य मंत्री और स्थानीय सांसद जितिन प्रसाद ने एक बड़ी योजना साझा की है, जिसके तहत यहाँ के चावल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाया जाएगा। यहां देश का दूसरा सबसे बड़ा बासमती और पहला जैविक कृषि प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा। एपीडा को इसके लिए 7 एकड़ जमीन सौंप दी गई है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा।

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टांडा बिजैसी में बनेगा अत्याधुनिक केंद्र

जितिन प्रसाद की घोषणा के अनुसार, पीलीभीत के टांडा बिजैसी में 7 एकड़ जमीन इस परियोजना के लिए आवंटित कर दी गई है। यहाँ बासमती निर्यात विकास केंद्र (BEDF) की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र कोई साधारण दफ्तर नहीं होगा, बल्कि यहाँ ऑडिटोरियम, एक खास संग्रहालय और उन्नत प्रयोगशालाएं होंगी। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) से मान्यता प्राप्त होगी, जहाँ वैज्ञानिक बासमती की नई और बेहतर किस्मों पर काम करेंगे।

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किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

अक्सर किसानों को अच्छी पैदावार के बावजूद सही बाजार नहीं मिल पाता। इस किसानों के लिए नई पहल के जरिए उन्हें न सिर्फ उच्च गुणवत्ता वाले बीज दिए जाएंगे, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का प्रशिक्षण भी मिलेगा। Pilibhit से बासमती चावल का निर्यात दुनिया के कई देशों में करने का लक्ष्य रखा गया है।

केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो मंत्रालय दिए मैं हमेशा जनता को इससे कुछ न कुछ देने की सोचता हूं इसी क्रम में मैने बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र सह प्रदर्शन फार्म पीलीभीत के लिए देने का काम किया है। मंत्री ने बताया कि इस केंद्र का नाम वीरांगना अवंती बाई लोधी के नाम पर रखा जाएगा, जो क्षेत्र के लोगों के लिए गर्व की बात है।

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जैविक खेती और रोजगार पर जोर

आजकल दुनिया भर में केमिकल मुक्त अनाज की मांग बढ़ रही है। इसीलिए इस योजना में जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देने पर खास ध्यान दिया गया है। जब फसल अवशेष मुक्त होगी, तो विदेशों में इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ेंगी। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि एग्री-टेक और बीज उत्पादन के क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। एपीडा (APEDA) और बीडीईएफ मिलकर बीज बोने से लेकर बाजार में बेचने तक किसानों का साथ देंगे।

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Pilibhit के लिहाज से यह एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। जितिन प्रसाद की इस पहल से पीलीभीत का पुराना गौरव वापस लौटता दिख रहा है। जब स्थानीय बासमती सात समंदर पार पहुंचेगी, तो इसका सीधा लाभ यहाँ के गाँवों और मेहनतकश किसानों को मिलेगा। इस कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के कई विधायक और भारी संख्या में किसान मौजूद रहे, जिन्होंने इस फैसले का स्वागत किया है।

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