Hardoi School Viral Video: सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे वीडियो सामने आते हैं जो पहली नजर में किसी को भी दोषी ठहराने के लिए काफी होते हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के हरदोई से एक स्कूल का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें प्रिंसिपल काफी गुस्से में नजर आ रही थीं। वीडियो के फैलते ही लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए, लेकिन अब इस मामले में प्रिंसिपल की सफाई सामने आई है। उन्होंने बताया है कि सिक्के का दूसरा पहलू क्या है और उस दिन स्कूल में असल में क्या हुआ था।
क्या है वायरल वीडियो का पूरा सच?
प्रिंसिपल ने वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि जो वीडियो इंटरनेट पर दिख रहा है, वह उनके व्यक्तित्व का पूरा सच नहीं है। उन्होंने बताया कि जिस दिन यह वीडियो बनाया गया, उस दिन स्कूल में सरकार द्वारा प्रायोजित वैक्सीनेशन का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम चल रहा था। 24 तारीख को बच्चों के टीकाकरण के लिए स्कूल प्रशासन पूरी तरह व्यस्त था, जिसकी जानकारी अभिभावकों को एक दिन पहले ही दे दी गई थी। प्रिंसिपल के मुताबिक, उनका सारा ध्यान बच्चों के टीकाकरण पर था ताकि सरकारी कार्यक्रम ठीक से संपन्न हो सके।
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हरदोई में एसपी तिराहे के पास फेमस ‘न्यू सन बीम पब्लिक स्कूल’ स्थित है। यहां पर पीड़ित नीलम वर्मा की बच्ची यूकेजी की छात्रा है। नीलम ने एक वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करते हुए स्कूल की प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप लगाया है नीलम ने बताया, ”प्रिंसिपल के द्वारा स्कूल से कॉपी-किताब नहीं खरीदने पर बदसलूकी की गई है” और उनसे बतमीजी से बात की गयी।

फीस को लेकर चल रहा था विवाद
प्रिंसिपल ने वीडियो में दिख रहे व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश बताया है। उनके अनुसार, वीडियो बनाने वाला व्यक्ति पिछले तीन सालों से स्कूल पर फीस न लेने का दबाव बना रहा था। स्कूल की एडमिशन फीस जो 2000 रुपये है, उसमें भी दबाव बनाकर कटौती करवाई गई थी। यही नहीं, 1300 रुपये की मासिक फीस देने में भी टालमटोल किया जा रहा था। जब प्रिंसिपल बच्चों के वैक्सीनेशन में व्यस्त थीं, तभी उस व्यक्ति ने जानबूझकर फीस के मुद्दे पर बहस शुरू की और वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया।
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वीडियो को एडिट करके किया गया वायरल
प्रिंसिपल की सफाई में यह बात भी जोर देकर कही गई कि वायरल वीडियो को काट-छांट कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षाविद के तौर पर वे बच्चों के भविष्य को लेकर काफी गंभीर रहती हैं। हरदोई में बहुत से लोग उनके काम और अनुशासन को जानते हैं। प्रिंसिपल का कहना है कि जब वे बच्चों के कार्यक्रम में व्यस्त थीं, तब किसी निजी स्वार्थ की बात सुनना उनके लिए संभव नहीं था। लगातार बाधा उत्पन्न करने के कारण ही उन्होंने डांटा था। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर उनके व्यवहार से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो वे इसके लिए माफी भी चाहती हैं।
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