उत्तर प्रदेश के Sant Kabir Nagar जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ प्रशासन ने अवैध निर्माण और संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए एक तीन मंजिला मदरसे को मलबे में तब्दील कर दिया। खलीलाबाद के मोती नगर मोहल्ले में स्थित यह मदरसा ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त मौलाना शमसुल हुदा खान का था, जिसे भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गिराया गया।
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भारी पुलिस सुरक्षा के बीच चला बुलडोजर
सोमवार की सुबह 10 बजे खलीलाबाद का यह इलाका किसी छावनी जैसा नजर आने लगा। करीब 6 जेसीबी मशीनों ने कमिश्नर कोर्ट के आदेश पर ध्वस्तीकरण शुरू किया। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर एसडीएम, एडीएम और सीओ समेत भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तीन थानों की 100 से अधिक पुलिसकर्मी, 30 महिला सिपाही और पीएसी की दो प्लाटून भी तैनात की गई थी।
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विदेशी फंडिंग और संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा
मौलाना शमसुल हुदा के खिलाफ एटीएस और ईडी की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई थीं। जांच के मुताबिक, मौलाना 2007 से ही संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था और पाकिस्तान के कई संगठनों के संपर्क में था। वह इस्लामी प्रचार के नाम पर पाकिस्तान जाता था। वह 2013 में ब्रिटेन का नागरिक बन गया था, लेकिन आरोप है कि वह 2017 तक भारत में मदरसे से वेतन लेता रहा। आरोप है कि इस दौरान उसने करीब 16 लाख रुपये अवैध रूप से प्राप्त किए। ईडी जांच में करोड़ों की विदेशी फंडिंग के मामले सामने आए.
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सरकारी जमीन पर बना था अवैध ढांचा
Sant Kabir Nagar का यह मदरसा करीब 640 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर बिना किसी वैध नक्शे के बनाया गया था। एक साल पहले ही इसे सील कर दिया गया था, जिसके बाद मामला कमिश्नर कोर्ट पहुंचा। याचिका खारिज होते ही प्रशासन ने इसे गिराने की तैयारी कर ली। फिलहाल मौलाना के खिलाफ धोखाधड़ी और आर्थिक अनियमितता के कई मुकदमे चल रहे हैं, जिसकी जांच एसआईटी (SIT) कर रही है।
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Sant Kabir Nagar की यह कार्रवाई प्रशासन की ओर से एक स्पष्ट संदेश है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में न केवल अवैध ढांचे को गिराया गया है, बल्कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी गाज गिरी है। आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच से इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।







