उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के लिए योगी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। इसमें अंकुर बेधक (अर्ली शूट बोरर) और चोटी बेधक (टॉप बोरर) कीट से फसल को बचाने के उपाय बताए गए हैं। विभाग का कहना है कि अप्रैल से जून तक का समय गन्ना फसल के लिए बेहद संवेदनशील होता है, ऐसे में सतर्कता जरूरी है। गन्ना विभाग के अनुसार प्रदेश के कुछ चीनी मिल क्षेत्रों में इन कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है। अंकुर बेधक और चोटी बेधक कीट पौधों की गोंफ को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे पौधे का बीच का हिस्सा सूखने लगता है और पौधा कमजोर हो जाता है। समय पर रोकथाम नहीं होने पर उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
किसानों को दिए गए जरूरी सुझाव
विभाग के वैज्ञानिकों ने किसानों को कई महत्वपूर्ण उपाय सुझाए हैं। प्रभावित पौधों को सूंड़ी और प्यूपा सहित जड़ से काटकर नष्ट करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा खेतों की नियमित निगरानी करने पर भी जोर दिया गया है ताकि शुरुआती अवस्था में ही कीटों को नियंत्रित किया जा सके। जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइकोकार्ड का 15 दिन के अंतराल पर उपयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं रासायनिक नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल 40 प्रतिशत और इमिडाक्लोप्रिड 40 प्रतिशत डब्ल्यू.जी. के मिश्रण का 500 ग्राम 1000 लीटर पानी में मिलाकर ड्रेंचिंग करने को कहा गया है। इसके अलावा क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल और थायोमेथॉक्सम मिश्रण का भी उपयोग प्रभावी बताया गया है।
वयस्क कीटों को पकड़ने के लिए खेतों में 25 से 30 मीटर की दूरी पर फेरोमोन ट्रैप और लाइट ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। साथ ही गन्ने की जड़ों के पास विशेष कीटनाशक घोल का उपयोग करने से भी बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक सलाह का पालन करें और समय रहते रोकथाम के उपाय अपनाएं। इससे न केवल फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है, बल्कि उत्पादन और आय दोनों में सुधार संभव है।







