लखनऊ KGMU में फिर ‘साजिश’ की आहट: 12वीं पास फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार, छात्राओं के धर्मांतरण की थी तैयारी

Share This Article

लखनऊ का प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी KGMU एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई मेडिकल उपलब्धि नहीं बल्कि एक गहरी साजिश है। मंगलवार को कैंपस से एक ऐसे फर्जी डॉक्टर को दबोचा गया है, जो न केवल छात्राओं को प्रेम जाल में फंसाकर धर्मांतरण कराने की फिराक में था, बल्कि खुद को डॉक्टर बताकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी भी कर रहा था। इस घटना के बाद से पूरे विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र-छात्राओं में हड़कंप मच गया है।

KGMU कैंपस में फर्जी डॉक्टर का जाल

KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि रमीज मलिक प्रकरण के बाद से ही कुलपति के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम कैंपस की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इसी निगरानी के दौरान हसम अहमद नाम के व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई गई। हसम अहमद खुद को डॉक्टर बताता था और हमेशा डॉक्टर की पोशाक (एप्रन और स्टेथोस्कोप) में ही घूमता था। वह अक्सर कैंपस में मेडिकल कैंप लगाता था और भोले-भाले छात्रों को अपनी बातों में फंसा लेता था।

KGMU

छात्राओं को बाहर ले जाने की बड़ी साजिश

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि हसम अहमद छात्राओं को एम्स दिल्ली ले जाने और वहां अमेरिका के डॉक्टरों से मिलवाने के नाम पर कैंपस से बाहर ले जाने की योजना बना रहा था। KGMU प्रशासन को सूचना मिली थी कि वह करीब 20 छात्राओं के संपर्क में था और उन्हें फर्जी लेटरहेड के जरिए गुमराह कर रहा था। आरोपी ने विश्वविद्यालय के नाम से फर्जी दस्तावेज और हस्ताक्षर तैयार कर रखे थे, ताकि किसी को उस पर शक न हो।

KGMU

12वीं पास आरोपी और उसका नेटवर्क

पुलिस की शुरुआती पूछताछ में पता चला कि खुद को डॉक्टर बताने वाला हसम अहमद असल में सिर्फ 12वीं पास है। वह मूल रूप से सिद्धार्थनगर का रहने वाला है और लखनऊ के शिया इंटर कॉलेज से पढ़ा है। उसने समाज सेवा के नाम पर एक संस्था बनाई थी, जिसके जरिए वह मेडिकल कैंप लगाता था। आरोपी ने दावा किया कि वह जल्द ही अपना अस्पताल खोलने वाला था और उसके साथ कुछ अन्य बड़े संस्थानों के डॉक्टर भी जुड़े हुए थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि KGMU के अंदर उसे किन लोगों का संरक्षण मिल रहा था।

KGMU

लव जिहाद और पुराने मामलों का असर

कैंपस में सुरक्षा और निगरानी बढ़ने की मुख्य वजह दिसंबर 2025 का वह मामला है, जिसे ‘लव जिहाद’ से जोड़कर देखा गया था। उस दौरान एक रेजिडेंट डॉक्टर पर जबरन धर्मांतरण और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे थे। उसी कड़वे अनुभव से सीख लेते हुए KGMU प्रशासन अब बाहरी लोगों और संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त नजर रख रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी घुसपैठ को रोकने के लिए सुरक्षा और अधिक कड़ी की जाएगी।

शिक्षण संस्थानों में बाहरी लोगों का इस तरह डॉक्टर बनकर घूमना और छात्राओं को निशाना बनाना सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है। KGMU प्रशासन की सतर्कता से एक बड़ी अनहोनी टल गई, लेकिन यह घटना अभिभावकों और छात्रों के लिए भी एक सबक है कि वे किसी भी लुभावने ऑफर या व्यक्ति की पहचान की पुष्टि किए बिना उस पर भरोसा न करें।

यह भी पढ़ें: Mathura में मिलावटी पनीर पर एक्शन: खाद्य विभाग की छापेमारी में भारी मात्रा में अस्वच्छ सामान नष्ट 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Live Channel

Advertisement

[wonderplugin_slider id=1]

Live Poll

आपके क्षेत्र में सबसे मजबूत दल कौन है?
  • Add your answer

Also Read This