कान्हा की नगरी Mathura में श्रद्धालुओं और आम जनता को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। हाल ही में खाद्य सुरक्षा विभाग ने शहर और ग्रामीण इलाकों की कई डेयरियों पर अचानक छापेमारी की। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य मिलावटी और गंदगी के बीच बनाए जा रहे दूध उत्पादों पर रोक लगाना है। इस अभियान के बाद से मिलावटखोरों में हड़कंप मचा हुआ है।
Mathura में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारी और उनकी टीम ने नौहझील के ग्राम भाईरई बांगर में स्थित डेयरी का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान वहां पनीर और दूध के नमूने लिए गए। टीम तब हैरान रह गई जब उन्होंने देखा कि वहां बेहद अस्वच्छ और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में काम हो रहा था। गंदगी को देखते हुए विभाग ने तुरंत डेयरी का संचालन बंद करने का आदेश दिया और उनका लाइसेंस सस्पेंड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अस्वच्छ पनीर और मिलावट पर लगाम
अभियान के दौरान टीम लालपुर रोड स्थित श्री बांके बिहारी डेयरी भी पहुंची। वहां भी पनीर के नमूने लिए गए और कमियों को सुधारने के लिए कड़ा नोटिस जारी किया गया। इसके अलावा, मांट के ग्राम बरौठ में एक डेयरी पर छापा मारा गया, जो बिना किसी रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से चल रही थी। यहां भी काम बंद कराकर संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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भारी मात्रा में नष्ट किया गया खराब पनीर
सबसे बड़ी कार्रवाई पैगांव स्थित डेयरी पर हुई। यहां टीम ने दूध, घी, मक्खन और खोआ समेत कई चीजों के सैंपल लिए। जांच के दौरान लगभग 250 किलो पनीर ऐसा मिला जो खाने योग्य नहीं था और गंदगी के बीच रखा गया था। करीब 50 हजार रुपये की कीमत के इस पनीर को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। विभाग ने कुल 10 नमूने लैब भेजे हैं और रिपोर्ट आने के बाद सख्त कानूनी कदम उठाने की बात कही है।
खाद्य विभाग की यह सक्रियता स्वागत योग्य है, क्योंकि मिलावटी सामान न केवल लोगों की सेहत से खिलवाड़ करता है बल्कि धार्मिक नगरी की छवि पर भी असर डालता है। अगर आप भी कहीं गंदगी या मिलावट देखते हैं, तो इसकी सूचना तुरंत विभाग को दें। सतर्कता ही सुरक्षित खान-पान की गारंटी है।
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