लखनऊ का विधान भवन रविवार को एक खास पल का गवाह बना। देश के रक्षा मंत्री Rajnath Singh पूरे 24 साल बाद इस ऐतिहासिक इमारत की दहलीज पर कदम रख रहे थे। मौका था विधान भवन में हुए नए बदलावों और आधुनिकीकरण को देखने का। सतीश महाना ने फूलों के साथ उनका स्वागत किया और फिर शुरू हुआ यादों और आधुनिक तकनीक के मेल का एक दिलचस्प सफर।
डिजिटल गैलरी और गौरवमयी इतिहास का सफर
सदन में पहुँचते ही रक्षा मंत्री ने सबसे पहले वहां बनी नई डिजिटल गैलरी देखी। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधान सभा के इतिहास पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म भी देखी। रक्षा मंत्री का मानना है कि इस तरह के डिजिटल प्रयोग जनप्रतिनिधियों के काम को और पारदर्शी बनाएंगे। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से विधायी कार्यों में काफी सुधार आएगा।
आज उत्तर प्रदेश विधानसभा के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध लोकतांत्रिक परंपराओं को नए रूप में जानने-समझने का अवसर मिला। परिसर में स्थापित ऑडियो-विज़ुअल संग्रहालय ने इसकी विरासत को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिसने मुझे गहराई से प्रभावित किया। यह अनुभव सचमुच मेरे लिए… pic.twitter.com/fTJHl8OPwi
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 12, 2026
आधुनिक सुविधाओं और नवाचारों की सराहना
भ्रमण के दौरान रक्षा मंत्री ने वर्चुअल हेलीकॉप्टर अनुभव लिया और आधुनिक गलियारों को देखा। उन्होंने टंडन हॉल, समिति कक्ष और गैलरी में लगे महापुरुषों के चित्रों का भी बारीकी से अवलोकन किया। Rajnath Singh ने यहाँ के भित्तिचित्रों और प्रवेश द्वार के नए स्वरूप की तारीफ करते हुए कहा कि पुरानी यादें ताजा हो गई हैं।
24 वर्षों पश्चात विधान भवन पधारे यशस्वी रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी का आज आत्मीय स्वागत किया । उन्होंने डिजिटल गैलरी में उत्तर प्रदेश के गौरवशाली विधायी इतिहास का अवलोकन किया और विधानसभा परिसर में किए गए आधुनिक नवाचारों की हृदय से प्रशंसा की।
उनके साथ ‘डिजिटल आत्म-चित्र’… pic.twitter.com/OD32fY7fk3— Satish Mahana (@Satishmahanaup) April 12, 2026
डिजिटल सेल्फी और खास भेंट
इस दौरे को और भी यादगार बनाने के लिए रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने विधान सभा अध्यक्ष के साथ एक डिजिटल सेल्फी (आत्म-चित्र) भी ली। अंत में, उन्हें एक विशेष पुस्तक भेंट की गई जिसमें उनके द्वारा विधान सभा में दिए गए पुराने भाषणों का संकलन था। Rajnath Singh ने कहा कि विधान भवन का यह नया और सुधरा हुआ रूप वाकई प्रभावशाली है।

यह दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे हमारी लोकतांत्रिक संस्थाएं तकनीक के साथ खुद को बदल रही हैं। 24 साल बाद लौटकर रक्षा मंत्री ने न केवल बदलावों को सराहा, बल्कि यह भी संदेश दिया कि गौरवमयी इतिहास को सहेजने के लिए आधुनिकता जरूरी है।