लखनऊ, 8 नवंबर 2025: देशभर में लगातार बढ़ती स्ट्रे डॉग्स की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि स्कूलों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अस्पतालों जैसे सार्वजनिक स्थानों को कुत्तों के हमलों से मुक्त किया जाए।
सर्वोच्च अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इन आवारा कुत्तों को डॉग शेल्टर होम में शिफ्ट किया जाए, जहां उनकी उचित देखभाल की जा सके।
Supreme Court ने स्वत: संज्ञान पर शुरू की कार्यवाही
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने यह कार्यवाही स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की। दरअसल, 28 जुलाई को दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने से हुई रेबीज मौतों पर आई मीडिया रिपोर्ट के बाद अदालत ने इसे गंभीरता से लिया। मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा –
“संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने का खतरा अब गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। यह जनसुरक्षा से जुड़ा मामला है।”
डॉग शेल्टर होम में शिफ्ट करने के आदेश
शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि सभी शैक्षणिक संस्थानों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अस्पतालों के परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। इन कुत्तों को सुरक्षित शेल्टर होम्स में रखा जाए जहां उनका टिकाकरण, भोजन और निगरानी सुनिश्चित हो।
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पेट्रोलिंग टीम गठित करने के निर्देश
अदालत ने स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया कि सड़कों से आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए एक संयुक्त पेट्रोलिंग दल का गठन किया जाए। पकड़े गए कुत्तों को बाद में शेल्टर होम्स में रखकर उनकी देखभाल की जाएगी।
तीन राज्यों ने ही दाखिल किए हलफनामे
27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की लापरवाही पर नाराजगी जताई थी। अब तक केवल पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अपने हलफनामे दाखिल किए हैं।
Supreme Court का रुख स्पष्ट
“सार्वजनिक सुरक्षा के साथ-साथ पशुओं के अधिकारों का भी सम्मान किया जाएगा। शेल्टर होम्स में उनके स्वास्थ्य, देखभाल और वैक्सीनेशन की पूरी व्यवस्था की जानी चाहिए।”