GST चोरी का बड़ा मामला सामने आया
शाहजहांपुर में पुलिस ने GST से जुड़ी एक बड़ी कर चोरी का खुलासा किया है। फर्जी फर्म बनाकर करीब दो करोड़ रुपये की GST चोरी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके पास से एक कार, फर्जी दस्तावेज, सात मोबाइल फोन, दस बिल्टी बुक और गाड़ियों का विवरण रखने वाले रजिस्टर बरामद किए हैं।
यह मामला तब सामने आया जब रोजा थाने में नवंबर महीने में GST चोरी की एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि यह कोई छोटा मामला नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का काम है।
कैसे पकड़ा गया गिरोह
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई थी। शनिवार को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध लोग कार से गुजरने वाले हैं।
अटसलिया पुल से पहले घेराबंदी कर पुलिस ने कार को रोका और उसमें सवार चार लोगों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में GST चोरी का पूरा नेटवर्क सामने आया।
गिरफ्तार आरोपियों में अखिलेश (रायबरेली), विपिन (गाजियाबाद), शिवओम शर्मा उर्फ सुमित (मुजफ्फरनगर) और राहुल राणा (शामली) शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक ये लोग लंबे समय से GST के नाम पर फर्जी लेन-देन दिखाकर कर चोरी कर रहे थे।
युवाओं को नौकरी का झांसा
जांच में सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को नौकरी का लालच देता था। उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो जैसे जरूरी दस्तावेज हासिल कर लिए जाते थे।
इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर बोगस GST फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था। इसके बाद उन्हीं फर्मों के नाम से कूटरचित ई-वे बिल और बिल्टी तैयार की जाती थी।
इस तरह GST प्रणाली का दुरुपयोग करते हुए लेन-देन दिखाया जाता था, जो असल में कागजों तक सीमित रहता था।
स्क्रैप कारोबार के जरिए कर चोरी
पुलिस के अनुसार गिरोह महाराजगंज, गोरखपुर और कुशीनगर जैसे जिलों से स्क्रैप खरीदता था। फिर इन सामानों को मुजफ्फरनगर में अवैध रूप से बेच दिया जाता था। कागजों में फर्जी बिल बनाकर GST भुगतान दिखाया जाता था, जबकि वास्तविक टैक्स जमा नहीं किया जाता था। एसपी के मुताबिक करीब 200 से 250 स्क्रैप से लदी गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पास कराया गया। इस पूरे खेल में GST रजिस्ट्रेशन और ई-वे बिल का गलत इस्तेमाल किया गया।
बरामद सामान से खुलेंगे और राज
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन और कई दस्तावेज जब्त किए हैं। इनमें बिल्टी बुक और रजिस्टर शामिल हैं, जिनमें गाड़ियों का पूरा हिसाब दर्ज है। इन रिकॉर्ड्स से उम्मीद है कि GST चोरी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी पता चल सकता है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल है। एसपी राजेश द्विवेदी ने कहा कि इस तरह की GST धोखाधड़ी पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
युवाओं के लिए चेतावनी
यह मामला युवाओं के लिए भी एक सीख है। नौकरी के नाम पर अपने दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को देना खतरनाक हो सकता है। आधार और पैन कार्ड जैसी पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी GST फर्म बनाना अब आम तरीका बनता जा रहा है। इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर नौकरी के नाम पर मांगी गई जानकारी देने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। शाहजहांपुर में सामने आया यह मामला दिखाता है कि GST प्रणाली का दुरुपयोग कैसे किया जा सकता है। लेकिन पुलिस की सतर्कता से इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ है।
फिलहाल चार आरोपी गिरफ्तार हैं और आगे की जांच जारी है। उम्मीद है कि GST चोरी से जुड़े इस नेटवर्क के बाकी पहलुओं का भी जल्द खुलासा होगा।
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