SC: प्राइवेसी का सम्मान करो या भारत छोड़ो, WhatsApp–Meta को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी

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WhatsApp और उसकी पैरेंट कंपनी Meta को देश की सबसे बड़ी अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार मिली है। सुप्रीम कोर्ट में 2021 की WhatsApp प्राइवेसी पॉलिसी पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कहा कि। तकनीकी कंपनियां भारत में रहकर नागरिकों की निजता से समझौता नहीं कर सकतीं… कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा… अगर कंपनियां भारतीय संविधान और कानूनों का पालन नहीं कर सकतीं, तो उन्हें भारत छोड़ देना चाहिए।  कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डेटा शेयरिंग के नाम पर किसी भी तरह की प्राइवेसी चोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट

SC को WhatsApp पॉलिसी पर क्या आपत्ति?

  • यूज़र्स की स्पष्ट सहमति नहीं
  • जटिल और गुमराह करने वाली भाषा
  • डेटा शेयरिंग पर अस्पष्ट शर्तें
  • प्राइवेसी पर खतरे की आशंका

Meta-WhatsApp पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

यह सुनवाई WhatsApp की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़े मामले में चल रही है। दरअसल, CCI ने नवंबर 2024 में व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन मानते हुए ₹213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। आरोप लगा कि व्हाट्सऐप ने डॉमिनेंट पोज़िशन का दुरुपयोग किया और यूज़र्स को नई पॉलिसी स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। जिसे NCLAT ने जनवरी 2025 में ‘डॉमिनेंस दुरुपयोग’ वाला निष्कर्ष तो हटाया, लेकिन 213 करोड़ का जुर्माना बरकरार रखा। इसी विरोधाभास को चुनौती देते हुए मेटा और व्हाट्सएप सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए जुर्माने को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि मेटा द्वारा जमा किया गया जुर्माना फिलहाल जमा रहेगा, लेकिन अगले आदेश तक उसे निकाला नहीं जा सकेगा।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने उदाहरण देते हुए कहा, डॉक्टर WhatsApp पर दवाइयों की लिस्ट भेजते हैं और कुछ ही मिनटों में उन्हीं दवाओं के विज्ञापन आने लगते हैं। यही अदालत की सबसे बड़ी चिंता है।  वहीं जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि डिजिटल फुटप्रिंट और बिहेवियरल डेटा का इस्तेमाल ऑनलाइन विज्ञापन के लिए किया जा रहा है। जिस पर सख्त निगरानी जरूरी है। Meta की ओर से दलील दी गई कि पॉलिसी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। अब सभी की नजरें 9 फरवरी पर हैं, जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अंतरिम आदेश दे सकता है। साथ ही इस मामले पर कोर्ट ने साफ कहा है कि यूजर डेटा का एक वर्ड भी बिना परमिशन के शेयर नहीं किया जाएगा।

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