रूस ने किया दुनिया की सबसे रहस्यमयी मिसाइल का सफल परीक्षण
नई दिल्ली। रूस ने हाल ही में अपनी न्यूक्लियर-पावर्ड क्रूज मिसाइल ‘बुरेवेस्टनिक’ (9M730) का सफल परीक्षण किया है। यह वही मिसाइल है जिसके बारे में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि यह किसी भी डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है और इसकी रेंज लगभग “अनलिमिटेड” है।
यह परीक्षण रूस के लिए सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि एक सामरिक संदेश भी है कि मॉस्को पश्चिमी दबावों, विशेष रूप से यूक्रेन युद्ध को लेकर, झुकने वाला नहीं है।
14,000 किलोमीटर की उड़ान और 15 घंटे तक हवा में
रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बुरेवेस्टनिक मिसाइल ने 21 अक्टूबर को हुए परीक्षण के दौरान करीब 14,000 किलोमीटर की दूरी तय की। यह मिसाइल लगभग 15 घंटे तक हवा में रही, जो इसकी क्षमता और सहनशक्ति दोनों को प्रदर्शित करता है।
इतनी लंबी उड़ान क्षमता के कारण यह किसी भी दिशा से हमला करने और दुश्मन की सीमाओं को अप्रत्याशित तरीके से भेदने में सक्षम है। इस परीक्षण को रूस की सैन्य शक्ति के “नए युग की शुरुआत” के रूप में देखा जा रहा है।
‘दुनिया में किसी के पास नहीं ऐसा हथियार’ — पुतिन
क्रेमलिन द्वारा जारी बयान में, राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन में युद्ध की निगरानी कर रहे जनरलों से कहा —
“यह एक अनोखा हथियार है जो दुनिया में किसी और के पास नहीं है।”
उन्होंने 2018 में पहली बार दिखाए गए इस मिसाइल सिस्टम को अमेरिका के मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम का जवाब बताया।
रूस का दावा है कि बुरेवेस्टनिक मिसाइल अमेरिका और नाटो के डिफेंस नेटवर्क को सफलतापूर्वक बायपास कर सकती है, जिससे वह रणनीतिक बढ़त हासिल कर सके।
बुरेवेस्टनिक मिसाइल क्या है?
रूसी भाषा में ‘बुरेवेस्टनिक’ (Burevestnik) का अर्थ होता है — “स्टॉर्म पेट्रेल”, यानी तूफ़ान से पहले उड़ने वाला पक्षी।
यह मिसाइल एक न्यूक्लियर-पावर्ड, न्यूक्लियर-कैपेबल क्रूज मिसाइल है।
नाटो ने इसे SSC-X-9 Skyfall नाम दिया है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका न्यूक्लियर इंजन है, जो इसे पारंपरिक फ्यूल पर निर्भर नहीं रहने देता।
इससे यह लगातार कई घंटों तक उड़ान भर सकती है, और सैद्धांतिक रूप से इसकी रेंज “अनलिमिटेड” बताई जाती है।
रूस का कहना है कि यह मिसाइल न केवल अत्यधिक लंबी दूरी तक जा सकती है बल्कि कम ऊँचाई पर उड़ान भरते हुए किसी भी रडार या मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बच सकती है।
मिसाइल डिफेंस सिस्टम को कैसे चकमा देती है बुरेवेस्टनिक?
आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम, जैसे कि अमेरिका का THAAD या Patriot, आमतौर पर सीमित दूरी और ऊँचाई पर आने वाली मिसाइलों को ट्रैक करते हैं।
लेकिन बुरेवेस्टनिक, अपनी अनिश्चित उड़ान पथ (Unpredictable Trajectory) और न्यूक्लियर-पावर्ड इंजन की वजह से पारंपरिक ट्रैकिंग सिस्टम को भ्रमित कर सकती है।
यह समुद्र, पर्वत, या धरती के किसी भी मार्ग से हमला करने में सक्षम है, जिससे दुश्मन को यह अनुमान लगाना लगभग असंभव हो जाता है कि यह कहाँ से आएगी।
इस मिसाइल की कम ऊँचाई पर उड़ान और गति परिवर्तन की क्षमता इसे डिटेक्ट करना और भी मुश्किल बना देती है।

सामरिक दृष्टि से क्यों अहम है यह परीक्षण?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह परीक्षण रूस के लिए एक स्ट्रेटेजिक मैसेज है।
मॉस्को यह दिखाना चाहता है कि यूक्रेन युद्ध या पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद उसकी रक्षा तकनीक और परमाणु क्षमता लगातार आगे बढ़ रही है।
यह अमेरिका को यह संकेत भी देता है कि रूस के पास ऐसी टेक्नोलॉजी है जो किसी भी प्रकार के डिफेंस नेटवर्क को “निष्क्रिय” कर सकती है।
इसके साथ ही, यह परीक्षण रूस के न्यूक्लियर ट्रायड (Nuclear Triad) को भी मजबूत करता है — यानी वह एक साथ जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु हमला करने में सक्षम है।
संभावित खतरे और वैश्विक चिंता
हालांकि यह तकनीकी रूप से एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन विशेषज्ञों ने न्यूक्लियर रिस्क को लेकर चिंता जताई है।
एक न्यूक्लियर-पावर्ड मिसाइल के परीक्षण से रेडिएशन फैलने का खतरा बना रहता है।
2019 में ऐसी ही एक मिसाइल टेस्ट के दौरान रूस में विस्फोट हुआ था जिसमें कई वैज्ञानिक मारे गए थे।
इस वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने रूस से आग्रह किया है कि वह इस तरह के परीक्षणों की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर अधिक जानकारी साझा करे।
तकनीकी क्रांति या राजनीतिक संदेश?
कई रक्षा विश्लेषक मानते हैं कि बुरेवेस्टनिक का परीक्षण सिर्फ सैन्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी है।
जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव, यूक्रेन युद्ध, और अमेरिका-नाटो के संबंधों में खिंचाव चरम पर है — ऐसे समय में रूस का यह परीक्षण वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
रूस यह दिखाना चाहता है कि उसके पास ऐसी ‘भविष्य की हथियार प्रणाली’ है जो किसी भी रणनीतिक रक्षात्मक दीवार को ध्वस्त कर सकती है।







