हमीरपुर (राठ) – बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले की राठ तहसील में दीपावली के अवसर पर रावण दहन की 100 साल पुरानी परंपरा आज भी जीवित है। इस परंपरा की शुरुआत तब हुई जब राठ में पहली रामलीला आयोजित की गई थी। उस समय रामलीला मैदान में बारिश का पानी जमा हो जाता था, जिससे दशहरा मनाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती थी।
स्थानीय लोगों ने तब यह परंपरा शुरू की कि दीपावली के दिन दशहरा मनाया जाएगा और रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इसके बाद से यह रिवाज लगातार निभाया जा रहा है। आज भी दीपावली पर राम और रावण के बीच युद्ध का मंचन किया जाता है, जिसमें स्थानीय कलाकार रामलीला का जीवंत रूप प्रस्तुत करते हैं।
रावण दहन के बाद मेले का आयोजन भी होता है, जिसमें आसपास के गांवों और कस्बों से लोग बड़ी संख्या में आते हैं। इस मेले में बच्चों और बड़ों के लिए मनोरंजन के साधन, मिठाइयाँ और पारंपरिक व्यंजन उपलब्ध कराए जाते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा सनातन धर्म और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का प्रतीक है। राठ के लोग इसे गर्व के साथ निभाते हैं और दीपावली के पर्व को धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव के रूप में मनाते हैं।
इस 100 साल पुरानी परंपरा ने न केवल राठ की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया है, बल्कि युवा पीढ़ी को भी अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का काम किया है। लोग कहते हैं कि यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक इसी तरह जीवित रहेगी।
रिपोर्ट: मेहर मधुर निगम







