राम की नगरी अयोध्या एक बार फिर इतिहास रचने जा रही है। 25 नवंबर को यहां राम मंदिर के ध्वजारोहण समारोह का आयोजन होने जा रहा है, जो न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा। रामजन्मभूमि परिसर में होने वाले ध्वजारोहण समारोह की तैयारियां पूरी रफ्तार से चल रही हैं। 20 नवंबर से शुरू हो रहे इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत कलश यात्रा से होगी, जो विशेष रूप से श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बनने जा रही है। विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रामलला के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की रूपरेखा तैयार की गई है। इस अनुष्ठान के तहत, अयोध्या में राम मंदिर के परिसर में 25 नवंबर को ध्वजारोहण किया जाएगा, जो भारत के धार्मिक इतिहास का महत्वपूर्ण क्षण होगा। इस आयोजन में काशी और दक्षिण भारत के 108 विद्वान भाग लेंगे, जो पूजा और पूजन विधियों का संचालन करेंगे।
20 नवंबर को कलश यात्रा से होगी शुरुआत
राम मंदिर के ध्वजारोहण समारोह की शुरुआत 20 नवंबर को कलश यात्रा के साथ होगी। यह यात्रा मार्गशीर्ष कृष्ण अमावस्या के शुभ दिन पर निर्धारित की गई है। इस यात्रा में 108 पीतवस्त्र धारी महिलाएं विशेष रूप से आमंत्रित की गई हैं, जो मंदिर परिसर में प्रवेश करने के बाद रामलला के दर्शन करेंगी। इसके अलावा, यात्रा में बैंड-बाजा और राम रथ विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। युवा कार्यकर्ताओं की टोली भगवा ध्वज के साथ यात्रा का नेतृत्व करेगी, जिसे ध्वजारोहण का प्रतीक माना जा रहा है।
कलश यात्रा का समय दोपहर 2:30 बजे निर्धारित किया गया है, और यह “अमृत काल” के दौरान संपन्न होगी, जो दोपहर 2:14 से 4:02 बजे तक रहेगा। इस दिन “सर्वार्थ सिद्धि योग” भी रहेगा, जो आयोजन को और भी शुभ बना देगा। इस यात्रा को सफल बनाने के लिए, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी डॉ. अनिल मिश्र अपनी पत्नी के साथ भाग लेंगे।
21 नवंबर से शुरू होगा मुख्य अनुष्ठान
कलश यात्रा के बाद 21 नवंबर से ध्वजारोहण के मुख्य अनुष्ठान की शुरुआत होगी। पहले दिन चतुर्वेदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पारायण किया जाएगा। यज्ञमंडप में हवन-पूजन की विधि भी पूरी धूमधाम से होगी, जिसमें गणपति पूजन, नंदी श्राद्ध, नवग्रह पूजन, और अरणि मंथन से अग्नि स्थापना जैसी विधियां शामिल होंगी। इस अनुष्ठान में अयोध्या, काशी और दक्षिण भारत के 108 विद्वान विशेष रूप से शामिल होंगे, जो इस पांच दिवसीय अनुष्ठान में धार्मिक आस्थाओं और मंत्रों का उच्चारण करेंगे।
यह आयोजन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें भाग लेने वाले विद्वान पूरे भारत से आए हैं, जिनकी उपस्थिति इस अनुष्ठान को और भी पवित्र बनाती है। काशी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने ध्वजारोहण के मुहूर्त की घोषणा की है, जो भारत के धार्मिक जीवन में एक ऐतिहासिक घटना साबित होगी।
सुरक्षा व्यवस्था और दर्शन को लेकर निर्णय
राम मंदिर परिसर में होने वाले इस ध्वजारोहण समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ी तैयारी की गई है। ट्रस्ट ने सुरक्षा कारणों से 24 नवंबर को रामलला के दर्शन स्थगित रखने का निर्णय लिया है। इसके बाद 25 नवंबर को ध्वजारोहण समारोह के दिन केवल आमंत्रित अतिथियों को ही दर्शन की अनुमति दी जाएगी। इस दिन लगभग आठ हजार अतिथियों को राम मंदिर परिसर में बैठाने की व्यवस्था की जाएगी।
ट्रस्ट ने आयोजन को सफल बनाने के लिए आठ सौ स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं की टीम नियुक्त की है, ताकि समस्त व्यवस्थाएं निर्बाध रूप से चल सकें। हालांकि, दर्शनार्थियों के निरंतर आगमन के कारण तैयारियों में बाधा उत्पन्न हो रही है, इसलिए ट्रस्ट और आयोजन समिति के सदस्यों के बीच 24 नवंबर को दर्शन स्थगित रखने पर विमर्श चल रहा है।
25 नवंबर का दिन बनेगा ऐतिहासिक
राम मंदिर के ध्वजारोहण समारोह का आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का प्रतीक भी बनेगा। 25 नवंबर को होने वाला यह समारोह भारतीय इतिहास में एक विशेष स्थान बनाएगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस ध्वजारोहण समारोह में शामिल होंगे, जो इस आयोजन को और भी ऐतिहासिक बना देगा।

