President द्रौपदी मुर्मु का बयान: भारत की काउंटर-टेरर रणनीति, सेना सुधार और विकसित भारत 2047 की दिशा पर जोर

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President द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और दुश्मन को पहले से रोकने (डिटरेंस) की रणनीति ने दुनिया को दिखा दिया है कि भारत सिर्फ ताकतवर सेना वाला देश ही नहीं है, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई करते हुए भी शांति और नैतिकता का ध्यान रखने वाला जिम्मेदार राष्ट्र है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज गुरुवार को भारतीय सेना के चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 के उद्घाटन समारोह में बोल रही थीं। राष्ट्रपति ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अवसंरचना, कनेक्टिविटी और शिक्षा को मजबूत करने में सेना के योगदान की सराहना की। उन्होंने यहां देश की सुरक्षा, सैन्य सुधारों व भविष्य की रणनीतिक दिशा पर महत्वपूर्ण संबोधन दिया।

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राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय रक्षा तंत्र केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय विकास का भी प्रमुख स्तंभ है। उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य पर कहा कि आज की दुनिया तकनीकी बदलावों, उभरते शक्ति केंद्रों, साइबर स्पेस व कॉग्निटिव वॉर जैसे नए युद्ध क्षेत्रों और बदलते गठबंधनों से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत अपने सांस्कृतिक सिद्धांत ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के आधार पर सामरिक स्वायत्तता और वैश्विक जिम्मेदारी दोनों का संतुलन बनाए हुए है।

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उन्होंने सेना में हो रहे बड़े सुधारों – जैसे संरचना में बदलाव, नई सोच के साथ सिद्धांतों को फिर से तय करना, और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से नई क्षमताएं विकसित करना – की सराहना की और कहा कि ये कदम भारत को आत्मनिर्भर रक्षा ताकत बनाने में बहुत मदद करेंगे। साथ ही, सेना द्वारा युवाओं और छात्रों के बीच देशभक्ति, अनुशासन और नेतृत्व विकसित करने के लिए शिक्षा, खेल और एनसीसी के जरिए किए जा रहे प्रयासों की भी उन्होंने तारीफ की।

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President मुर्मु ने यह भी कहा कि सेना में युवाओं और खासकर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत के समावेशी और संतुलित विकास को और मजबूत करेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि चाणक्य डिफेंस डायलॉग  में होने वाली चर्चा भविष्य की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को दिशा देने में काम आएगी।

इस डायलॉग का थीम है – “रीफॉर्म टू ट्रांसफॉर्म – सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत”। यहां राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली, भविष्य के युद्धों की तैयारी, आतंकवाद के खिलाफ नई रणनीति, दक्षिण एशिया में आतंकवाद रोकने की रूपरेखा और 2047 तक एक मजबूत व विकसित भारत बनाने के रोडमैप पर विशेषज्ञों द्वारा गहन चर्चा की जा रही है।

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