उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस 2025 का विषय ‘सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए दिव्यांगता-समावेशी समाजों को बढ़ावा’ इसी प्रगतिशील विचार पर आधारित है।

राष्ट्रपति ने खुशी जाहिर की कि भारत दिव्यांगजनों के लिए अधिकार-आधारित और सम्मानपूर्ण व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। 2015 में दिव्यांगजन शब्द को अपनाकर दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार दिव्यांगजनों के समावेश और सशक्तिकरण के लिए विभिन्न पहल कर रही है, जैसे कि सांकेतिक भाषा अनुसंधान, मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास और खेल प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना। लाखों दिव्यांगजनों को विशिष्ट विकलांगता पहचान पत्र जारी किए गए हैं, जिससे उन्हें विशेष सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।

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राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि समाज को भी दिव्यांगजनों के हित में जागरूक और सक्रिय रहना चाहिए, ताकि सरकार के प्रयासों को मजबूती मिले। इसके साथ ही, उन्होंने यह बताया कि दिव्यांगजनों की गरिमा और स्वावलंबन सुनिश्चित करना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है, प्रत्येक नागरिक को सामाजिक और राष्ट्रीय प्रगति के अपने प्रयासों में दिव्यांगजनों को भागीदार बनाने का संकल्प लेना चाहिए।