प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर अपने विचारों और संदेशों के जरिए लोगों को प्रेरित करते रहते हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने सोमवार को अपने डिजिटल हैंडल का इस्तेमाल करते हुए कुछ बहुत ही गहरे और व्यावहारिक विचार साझा किए हैं। इंटरनेट के इस दौर में जहां रोज हजारों बातें होती हैं, वहीं प्रधानमंत्री ने प्राचीन ज्ञान के जरिए आज के समाज को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। उनके इस ताजा संदेश ने इंटरनेट पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
आपसी समझ और भाईचारे पर दिया बड़ा संदेश
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद खास संस्कृत सुभाषित शेयर किया। इस पोस्ट को साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि जब हम दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों और तौर-तरीकों का सम्मान करते हैं, तो इससे समाज में आपसी विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने बताया कि इस तरह की सोच से लोगों के बीच सहयोग की भावना और भाईचारा बढ़ता है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस श्लोक का सीधा सा अर्थ यही है कि जो व्यक्ति अलग-अलग परंपराओं और सामाजिक नियमों को अच्छी तरह समझता है, उसके भीतर सही और गलत की सही पहचान करने की समझ आ जाती है। ऐसा इंसान समाज में हर जगह आदर पाता है और समझदार लोगों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाता है।
दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है। इससे आपसी समझ और भाईचारा और मजबूत होता है।
देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः।
स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥ pic.twitter.com/sPpJlYZbAM
— Narendra Modi (@narendramodi) June 29, 2026
एकता और एकजुटता का पुराना संदेश
यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री ने इस तरह का कोई संदेश दिया हो। इससे पहले 26 जून को भी उन्होंने इंटरनेट पर एक और श्लोक साझा किया था, जिसका संदेश पूरी तरह से समाज में एकता बनाए रखने पर केंद्रित था। उस श्लोक का भाव यह था कि हम सबको जीवन में एक साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए, हमारी सोच और आवाज में एकरूपता होनी चाहिए। जैसे पुराने समय में सभी मिलकर अपने कर्तव्यों को पूरा करते थे, वैसे ही हमें भी आपसी सौहार्द के साथ रहना चाहिए।
सङ्गच्छध्वं संवदध्वं
सं वो मनांसि जानताम्।देवा भागं यथा पूर्वे
सञ्जानाना उपासते॥ pic.twitter.com/9pqUKmELTo— Narendra Modi (@narendramodi) June 26, 2026
आजादी के महत्व को किया याद
इसके अलावा बीते गुरुवार को देश के एक ऐतिहासिक मोड़ को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी बात रखी। उन्होंने संविधान हत्या दिवस के मौके पर एक और श्लोक साझा किया, जो पूरी तरह से मानवीय स्वतंत्रता पर आधारित था। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता ही वह माध्यम है जिससे इंसान को असली सुख, शांति और जीवन की सर्वोच्च उपलब्धियां हासिल होती हैं। उन्होंने इस मौके पर आपातकाल के दौर का जिक्र करते हुए लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा करने वाले सभी लोगों को याद किया।
संविधान हत्या दिवस आज हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था। यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने को प्रेरित करता है। आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को सादर नमन।
स्वातन्त्र्यात्… pic.twitter.com/hBr3DzrtsR
— Narendra Modi (@narendramodi) June 25, 2026
देखा जाए तो प्रधानमंत्री द्वारा समय-समय पर साझा किए जाने वाले ये प्राचीन श्लोक हमें याद दिलाते हैं कि आज के आधुनिक दौर में भी हमारी संस्कृति की बातें कितनी प्रासंगिक हैं। चाहे वह दुनिया भर की संस्कृतियों का सम्मान करना हो, आपस में मिलकर चलना हो या फिर अपनी आजादी की रक्षा करना हो, ये सभी बातें एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए बेहद जरूरी हैं।
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