Chinmaya Amrit Mahotsav प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और विकसित भारत के लक्ष्य पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक ऐसा विचार है, जो पीढ़ियों को ज्ञान और संस्कारों से जोड़ता है। पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के योगदान को याद करते हुए युवाओं से देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
चिन्मय अमृत महोत्सव में पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन की यात्रा संकल्प, सेवा और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ी रही है। उन्होंने मिशन के संतों, आचार्यों, साधकों और अनुयायियों को अमृत महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने आधुनिक तकनीक के जरिए स्वामी चिन्मयानंद के होलोबॉट से बातचीत के अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि इससे उन्हें वर्ष 1993 में वडोदरा में स्वामी चिन्मयानंद से हुई मुलाकात याद आ गई। प्रधानमंत्री के अनुसार, गुरुदेव का स्नेह और आशीर्वाद उनके लिए आज भी महत्वपूर्ण है।
स्वामी चिन्मयानंद ने युवाओं को दी थी नई दिशा
प्रधानमंत्री ने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद के साथ उनकी आखिरी मुलाकातों में युवाओं की भूमिका और सशक्त भारत के निर्माण पर चर्चा हुई थी। स्वामी चिन्मयानंद चाहते थे कि युवा अपनी क्षमता पहचानें और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। पीएम मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में काम करने के समय से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक, युवाओं की भागीदारी उनके लिए महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने चिन्मय अमृत महोत्सव से जुड़े युवाओं के प्रयासों की भी सराहना की। कार्यक्रम से जुड़े युवाओं ने करीब 300 दिनों में 40 हजार किलोमीटर की यात्रा की और एक लाख से अधिक युवाओं से संपर्क बनाया। यह पहल युवाओं को भारतीय संस्कृति और देश के विकास से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा पर जोर
पीएम मोदी ने उपनिषदों के कथन ‘वयम् अमृतस्य पुत्राः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान, चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान हजारों वर्षों से बनी हुई है। इसका आधार केवल परंपराएं नहीं, बल्कि ज्ञान, विचार और मानव कल्याण की भावना भी है। प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के गीता ज्ञान यज्ञ का जिक्र करते हुए कहा कि इसके माध्यम से वेदांत, उपनिषदों और भारतीय शास्त्रों के ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। आज चिन्मय मिशन के लाखों युवा इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
नई शिक्षा नीति में परंपरा और आधुनिकता का मेल
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ आधुनिक विज्ञान और तकनीक को भी महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को भारतीय संस्कारों से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। चिन्मय मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थान आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय मूल्यों को भी विद्यार्थियों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
पीएम मोदी के अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए।
विवेकानंद रॉक मेमोरियल में स्वामी चिन्मयानंद का योगदान
प्रधानमंत्री ने कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद रॉक मेमोरियल के निर्माण में स्वामी चिन्मयानंद के योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि एकनाथ रानाडे के इस प्रयास में स्वामी चिन्मयानंद ने सहयोग दिया और शुरुआती आर्थिक योगदान भी किया। आज यह स्मारक स्वामी विवेकानंद के विचारों और भारतीय आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या के राम मंदिर, महाकाल महालोक और केदारनाथ-बद्रीनाथ जैसे धार्मिक स्थलों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्रों को नई पहचान मिल रही है। साथ ही, विदेशों में पहुंचाई गई प्राचीन भारतीय मूर्तियों को वापस लाने के प्रयासों का भी जिक्र किया।
2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प
पीएम मोदी ने कहा कि वर्ष 2047 में भारत की आजादी के 100 साल पूरे होंगे। इसी अवधि में चिन्मय मिशन भी अपनी शताब्दी की यात्रा की ओर बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि देश के विकास और मिशन की आध्यात्मिक यात्रा के लक्ष्य एक-दूसरे को मजबूत कर सकते हैं। इसके लिए समाज के अलग-अलग वर्गों को एकजुट करना, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने सभी से अपील की कि वे अपनी विरासत पर गर्व करें और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में योगदान दें।
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