नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी उत्कृष्टता, समर्पण और सेवा भारत के सामाजिक ताने-बाने को और अधिक मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि ये सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा, नवाचार और उत्कृष्टता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि पद्म पुरस्कार विजेताओं का योगदान यह दिखाता है कि प्रतिबद्धता और निरंतर परिश्रम से समाज और राष्ट्र को किस तरह समृद्ध किया जा सकता है।
सरकार ने साल 2026 के लिए कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं और इन्हें हर वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किया जाता है। इन पुरस्कारों का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों—जैसे कला, साहित्य, शिक्षा, खेल, विज्ञान, समाजसेवा, सार्वजनिक जीवन और उद्योग—में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करना है।
इस वर्ष पद्म विभूषण से सम्मानित होने वालों में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन (मरणोपरांत), हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन (मरणोपरांत) शामिल हैं। इन सभी को सार्वजनिक जीवन, राजनीति और कला के क्षेत्र में दशकों तक दिए गए असाधारण योगदान के लिए यह सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया गया है।
पद्म भूषण पुरस्कार पाने वालों में पार्श्व गायिका अलका याग्निक, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, मलयालम सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता ममूटी और देश के प्रमुख बैंकर उदय कोटक शामिल हैं। इनके अलावा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कई अन्य प्रतिष्ठित नामों को भी पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है।
खेल जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। हरमनप्रीत कौर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का नाम ऊंचा किया है और महिला क्रिकेट को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। उनके सम्मान से खेल जगत में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया है।
पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं। पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है, पद्म भूषण उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए और पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है। इन सम्मानों का चयन एक विस्तृत प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और समितियों की राय शामिल होती है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पद्म पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये सभी लोग सामाजिक परिवर्तन के मशालवाहक हैं, जिन्होंने अपनी असाधारण उपलब्धियों, नवाचारों और अथक प्रयासों के जरिए देश को आगे बढ़ाया है। अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि पद्म पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का प्रतीक हैं, जिसमें “जनता के पद्म” के माध्यम से आम लोगों को प्रेरित कर राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत किया जा रहा है।
सरकारी बयान के अनुसार, पद्म विभूषण पुरस्कार पाने वालों में महाराष्ट्र से कला के क्षेत्र में धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत), केरल से सार्वजनिक मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस, उत्तर प्रदेश से कला के लिए प्रसिद्ध वायलिन उस्ताद एन राजम, केरल से साहित्य और शिक्षा के लिए जाने-माने मलयालम पत्रकार पी नारायणन और सार्वजनिक जीवन के लिए वीएस अच्युतानंदन (मरणोपरांत) शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पद्म पुरस्कार केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों को ही नहीं, बल्कि भारत की विविधता और समावेशी संस्कृति को भी दर्शाते हैं। इनमें राजनीति, कला, साहित्य, विज्ञान, खेल, उद्योग और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल होते हैं, जो यह साबित करते हैं कि राष्ट्र निर्माण में हर क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने बीते वर्षों में पद्म पुरस्कारों के चयन में जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों को भी विशेष महत्व दिया है। “जनता के पद्म” की अवधारणा के तहत ऐसे कई नाम सामने आए हैं, जिन्होंने दूरदराज के इलाकों में रहकर समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य किए, लेकिन जो पहले राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा चर्चित नहीं थे।
पद्म पुरस्कारों की यह घोषणा एक बार फिर यह संदेश देती है कि भारत प्रतिभा, सेवा और समर्पण को सम्मान देने वाला देश है। यह सम्मान न केवल पुरस्कार पाने वालों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।