Bihar की सियासत में एक बहुत बड़े युग का अंत होने जा रहा है। पिछले दो दशकों से बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सियासी गलियारों से जो खबरें निकलकर आ रही हैं, उनके मुताबिक नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने की तारीख तय हो गई है। यह बिहार के इतिहास में एक बड़ा मोड़ है क्योंकि करीब 20 साल बाद राज्य की कमान किसी नए चेहरे के हाथ में होगी और पहली बार बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही है।
नीतीश कुमार का दिल्ली प्रस्थान और राज्यसभा की शपथ
नीतीश कुमार अब बिहार की सक्रिय राजनीति से निकलकर दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति में अपना हाथ आजमाएंगे। गुरुवार को वह पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं। शुक्रवार, 10 अप्रैल को वह राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। नीतीश के करीबियों का कहना है कि उन्होंने केंद्र में अपनी नई भूमिका के लिए मन बना लिया है। शपथ लेने के बाद शनिवार को वह वापस पटना लौटेंगे, जिसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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14 अप्रैल को इस्तीफा और एनडीए की बैठक
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप सकते हैं। उसी दिन पटना में एनडीए विधायक दल की एक अहम बैठक बुलाई गई है। माना जा रहा है कि इसी बैठक में नीतीश कुमार आधिकारिक तौर पर पद छोड़ने का ऐलान करेंगे और नए नेता के नाम का प्रस्ताव रखा जाएगा। जेडीयू के नेता विजय कुमार चौधरी ने भी साफ कर दिया है कि अब Bihar की सत्ता का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) करेगी।
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Bihar के मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे कौन?
बिहार में बीजेपी का पहला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। फिलहाल इस रेस में बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। उनके अलावा विजय कुमार सिन्हा और कुछ अन्य सीनियर लीडर्स के नामों पर भी विचार हो रहा है। 10 अप्रैल को दिल्ली में एक हाई-प्रोफाइल बैठक होने वाली है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह खुद शामिल हो सकते हैं। इस बैठक में बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।
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शपथ ग्रहण समारोह और पीएम मोदी की मौजूदगी
बिहार में नई सरकार का गठन 14 अप्रैल की शाम या फिर 15 अप्रैल को होने की संभावना है। खबर है कि इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार आ सकते हैं। बीजेपी इस मौके को बेहद खास बनाना चाहती है, क्योंकि दशकों के इंतजार के बाद पार्टी अपने दम पर बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल करने जा रही है।
नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल देगा। पिछले 20 सालों में उन्होंने ‘सुशासन बाबू’ की छवि के साथ राज्य पर राज किया, लेकिन अब बीजेपी के लिए खुद को साबित करने की चुनौती होगी। क्या सम्राट चौधरी बिहार की उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे? यह आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल सबकी नजरें 14 अप्रैल की उस बैठक पर टिकी हैं।
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