लखनऊ/डिजिटल डेस्क: चैत्र नवरात्रि 2026 के पावन पर्व पर जहां देशभर में कन्या पूजन की धूम है, वहीं सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने परंपरा और आधुनिकता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। आमतौर पर अष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं को माता का स्वरूप मानकर हलवा, पूरी और काले चने का पारंपरिक भोग लगाया जाता है। लेकिन इस बार एक ‘मॉडर्न कंजक भोज’ (Modern Kanjak Bhog) का वीडियो सामने आया है, जिसमें छोटी कन्याओं की थाली में देसी घी के हलवे की जगह मैगी और बर्गर नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के वायरल होते ही इंटरनेट यूजर्स दो गुटों में बंट गए हैं।
परंपरा से हटकर ‘चटपटा’ बदलाव
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक परिवार ने कन्या पूजन के दौरान सदियों से चली आ रही हलवा-पूरी की रस्म को एक नया ट्विस्ट दिया है। कन्याओं के सामने जब मैगी और मिनी बर्गर की थाली परोसी गई, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वीडियो में बच्चियां पारंपरिक भोजन के मुकाबले इस ‘फास्ट फूड’ भोग को देखकर ज्यादा उत्साहित और चहकती हुई नजर आ रही हैं। परिवार का तर्क है कि पूजा का मुख्य उद्देश्य नन्हीं कन्याओं को खुश करना है, और जो उन्हें पसंद है वही परोसना सबसे बड़ी सेवा है।
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सोशल मीडिया पर छिड़ा ‘महायुद्ध’: परंपरा vs पसंद
इस वीडियो के कमेंट सेक्शन में विचारों का सैलाब उमड़ पड़ा है। यूजर्स की राय इस मुद्दे पर पूरी तरह बंटी हुई नजर आ रही है:
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समर्थक पक्ष: एक वर्ग का कहना है कि “भगवान भाव के भूखे होते हैं, स्वाद के नहीं।” अगर बच्चे मैगी खाकर ज्यादा खुश हो रहे हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। उनके अनुसार, बदलते समय के साथ रीति-रिवाजों में थोड़े बदलाव स्वीकार्य होने चाहिए।
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विरोधी पक्ष: वहीं, पारंपरिक विचारधारा वाले लोग इसे ‘संस्कृति के साथ खिलवाड़’ बता रहे हैं। उनका तर्क है कि सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज का हलवा-चना) ही पूजा का असली विधान है। साथ ही, सेहत के नजरिए से भी कन्याओं को जंक फूड परोसना गलत बताया जा रहा है।
सेहत और शास्त्र: विशेषज्ञों की राय
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि कन्या पूजन में ‘सात्विक’ भोजन का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह शुद्धता और भक्ति का प्रतीक है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है कि खाली पेट बच्चों को मैदा युक्त बर्गर और मैगी देना उनके पाचन तंत्र के लिए ठीक नहीं है। हालांकि, विवाद अपनी जगह है और उन नन्हीं कन्याओं के चेहरों पर खिली मुस्कान अपनी जगह, जिसने इस मुद्दे को देशव्यापी चर्चा का केंद्र बना दिया है।