उत्तर प्रदेश के Meerut शहर से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट से आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय प्लॉटों पर नियमों के खिलाफ चल रहे 44 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को तुरंत सील करने का कड़ा निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद पूरे इलाके के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन अब कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले सीलिंग की प्रक्रिया को पूरा करने की तैयारी में है।
आवासीय प्लॉटों पर अवैध निर्माण की बड़ी कार्रवाई
Meerut के शास्त्री नगर सेक्टर 1 से 13 तक का यह विवाद काफी पुराना है, लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। जिन 44 इमारतों पर गाज गिरी है, उनमें सिर्फ छोटी दुकानें ही नहीं बल्कि 6 बड़े स्कूल, 6 निजी अस्पताल, 4 बैंकट हॉल और 28 व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। Meerut आवास विकास परिषद की टीम ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सभी भवन स्वामियों को चेतावनी दी है कि वे जल्द से जल्द अपनी इमारतें खाली कर दें।

छात्र और मरीजों की शिफ्टिंग का चुनौतीपूर्ण काम
सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्रवाई के दौरान मानवीय संवेदनाओं का भी ख्याल रखा है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि Meerut के इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य खराब न हो, इसलिए उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। इसी तरह, जिन अस्पतालों को सील किया जाना है, उनमें भर्ती मरीजों को भी अन्य चिकित्सा केंद्रों में स्थानांतरित करने की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंपी गई है। Meerut प्रशासन के लिए इतने कम समय में छात्रों और मरीजों को दूसरी जगह भेजना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
व्यापारियों का गुस्सा और ‘जीवन-मरण’ की दुहाई
इस आदेश के विरोध में Meerut के व्यापारी सड़कों पर उतर आए हैं। शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों, डॉक्टरों और स्कूल प्रबंधकों ने मिलकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सरकार को नियमित रूप से टैक्स और जीएसटी देते हैं, इसके बावजूद उनके रोजगार को छीना जा रहा है। Meerut में हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने इसे अपने लिए ‘जीवन-मरण’ का संकट बताया। व्यापारियों के समर्थन में विपक्षी दलों के नेता भी पहुँचने लगे हैं।
1400 दुकानों पर मंडरा रहा है खतरा
यह कार्रवाई तो बस शुरुआत मानी जा रही है। आवास विकास परिषद ने Meerut के इस इलाके में ऐसी 1400 से ज्यादा दुकानों को चिन्हित किया है जो आवासीय प्लॉटों पर बनी हुई हैं। फिलहाल उन 44 संपत्तियों पर एक्शन लिया जा रहा है जो पूरी तरह से कमर्शियल तौर पर इस्तेमाल हो रही थीं। अब सबकी निगाहें 9 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
Meerut के शास्त्री नगर का यह मामला शहर में शहरी नियोजन और नियमों के उल्लंघन की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है। एक तरफ जहां कोर्ट ने कानून का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती दिखाई है, वहीं दूसरी तरफ हजारों लोगों के रोजगार पर तलवार लटक गई है। अब देखना यह होगा कि Meerut प्रशासन इस जटिल स्थिति को बिना किसी बड़े विवाद के कैसे सुलझाता है।
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