Mathura: बसंती कमरे के दर्शनों के लिए उमड़ा भक्तों का सैलाब, भगवान की मनमोहक छवि तैयार

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Mathura बृज मंडल में बसंतोत्सव का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। बसंत पंचमी के साथ ही ब्रज के प्रमुख मंदिरों में उत्सवों की श्रृंखला शुरू हो जाती है। वृंदावन स्थित शाहजी मंदिर, जिसे टेढ़े खंभे वाला मंदिर भी कहा जाता है, साल में केवल एक दिन खुलने वाले बसंती कमरे के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर राधा-कृष्ण के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु लंबी कतारों में दर्शन करते नजर आए। इस बसंती कमरे में राधारमण ठाकुर पीले वस्त्रों में विराजमान होते हैं और विदेशी झालरों व आकर्षक सजावट से कमरा सुसज्जित रहता है। मंदिर के गोस्वामी प्रशांत शाह के अनुसार, इस कमरे का निर्माण 1863 में लखनऊ के नवाब फुंदनलाल शाह और कुंदन लाल शाह ने कराया था। मान्यता है कि बसंती कमरे के दर्शन से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

बसंत पंचमी पर भक्तों की उमड़ी भीड़

शाह बिहारी मंदिर में बसंत पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने बसंती कमरे में सतरंगी रोशनी के बीच स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान ठा. राधारमण लाल के दर्शन कर पुण्यलाभ प्राप्त किया।टेढ़े खंभे के लिए विख्यात शाह बिहारी मंदिर में बसंती कमरा दर्शनार्थियों के लिए साल में केवल दो बार खुलता है – रक्षाबंधन और बसंत पंचमी पर, प्रत्येक अवसर पर दो-दो दिन के लिए। बसंत पंचमी के दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक तथा शाम 5 बजे से देर शाम तक श्रद्धालु बसंती कमरे में विराजमान श्रीजी के दर्शन करते है। शाम को भजन संध्या का भी आयोजन किया गया।

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भव्य सजावट और मंत्रमुग्ध कर देने वाली छटा

बसंती कमरे को विदेशी झाड़-फानूस, विद्युत उपकरणों से सजाया गया, जिससे सतरंगी रोशनी और दर्पणों की चमक ने कमरा अत्यंत आकर्षक बना दिया। स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान ठा. राधारमण जू का बसंती रंग का श्रृंगार भक्तों का ध्यान खींच रहा था।

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दुर्लभ वास्तुकला और मंदिर की विशेषताएं, दर्शन और भजन संध्या का समय

मंदिर की बनावट और 15 फुट ऊंचे टेढ़े खंभे भी भक्तों का आकर्षण बने। रोमन शैली की मुंडेर, बेशकीमती झाड़-फानूस और दर्पण इसकी पहचान हैं। चौक में अन्य सखियों की मूर्तियों के साथ नवाब वाजिद अली शाह की टोपी पहने सखी की मूर्ति भी स्थापित है, जिस पर श्रद्धालुओं के चरण पड़ने से विशेष पुण्य मिलता है। प्रशांत शाह, मंदिर के व्यवस्थापक, के अनुसार बसंती कमरे में दर्शन सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम 5 बजे से देर शाम तक होते हैं। साथ ही, शाम को भजन संध्या का आयोजन भी किया गया।

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