कानपुर में बढ़ते प्रदूषण से हृदय और श्वसन रोगी बढ़े, आठ गुना अधिक हृदय फेलियर के केस

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कानपुर में जहरीली हवा ने बढ़ाई बीमारी, आठ गुना बढ़े हार्ट फेलियर के केस

कानपुर की हवा एक बार फिर ज़हर उगल रही है। शहर का एक्यूआई खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है और इसका सीधा असर अब लोगों की सेहत पर दिख रहा है। एलपीएस कार्डियोलॉजी के निदेशक एवं प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि हृदय के दाहिने हिस्से के फेल होने वाले रोगियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में आठ गुना तक बढ़ गई है।

डॉ. वर्मा के अनुसार, आमतौर पर 10 फीसदी मरीज ऐसे होते हैं जिनके हृदय का दाहिना हिस्सा फेल होता है, लेकिन इस समय यह आंकड़ा 80 फीसदी तक पहुंच गया है। पिछले 24 घंटों में अस्पताल में भर्ती 76 मरीजों में से 65 मरीज ऐसे हैं जिनके हृदय का दाहिना हिस्सा काम करना बंद कर चुका है।

उन्होंने बताया कि प्रदूषण के कारण फेफड़ों में ऑक्सीजन का संचार प्रभावित होता है, जिससे हृदय को अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ता है। जो मरीज पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह प्रदूषण जानलेवा साबित हो सकता है।

अस्थमा और सीओपीडी मरीजों में बढ़ी परेशानी

हैलट इमरजेंसी और डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल में अस्थमा और सीओपीडी (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले 24 घंटों में 18 गंभीर मरीजों को भर्ती किया गया। इनमें से कई मरीज इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में हैं।

रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा दोगुना हो गया है। जिन मरीजों को पहले कभी हल्की खांसी या सांस फूलने की समस्या थी, अब उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ रही है।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. बीपी प्रियदर्शी ने बताया कि इमरजेंसी में 85 मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें 10 गंभीर रूप से बीमार मरीज सांस की तकलीफ के कारण पहुंचे। इनमें कुछ डायबिटीज और हार्ट डिजीज से पीड़ित थे, जिन्हें प्रदूषण ने और अधिक कमजोर कर दिया।

नाक, कान और गले की एलर्जी के रोगी दोगुना हुए

ईएनटी विशेषज्ञों के मुताबिक, कानपुर में प्रदूषण के कारण एलर्जी से पीड़ित मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। ईएनटी फाउंडेशन के निदेशक डॉ. देवेंद्र लालचंदानी ने बताया कि सामान्य दिनों में 25% मरीज एलर्जी से पीड़ित होते हैं, लेकिन वर्तमान समय में यह संख्या 50% तक पहुंच गई है।

उन्होंने बताया कि धूल, धुआं और परागकण मिलकर ऐसी स्थिति बना रहे हैं जिससे सांस लेने और गले में जलन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस मौसम में बाहर निकलने से पहले मास्क पहनना अनिवार्य कर लें। सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण का स्तर चरम पर होता है, तब व्यायाम से बचें। घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और पानी अधिक मात्रा में पिएं।

डॉ. राकेश वर्मा ने कहा कि अगर सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। प्रदूषण से बचाव ही फिलहाल सबसे बड़ा इलाज है।

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