पूर्व मुख्यमंत्री की जन्मभूमि को मिलेगी नई पहचान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक नक्शे में जल्द एक और नया जिला जुड़ने जा रहा है। सरकार ने ‘कल्याण सिंह नगर’ नाम से 76वें जिले के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह नया जिला पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह की स्मृति में बनाया जाएगा, जिनका नाम भारतीय राजनीति में ईमानदारी, सादगी और जनसेवा के लिए जाना जाता है।
नया जिला अलीगढ़ और बुलंदशहर के कुछ हिस्सों को जोड़कर बनाया जाएगा। इसमें अलीगढ़ की अतरौली और गंगीरी तहसील तथा बुलंदशहर की डिबाई तहसील शामिल की जाएंगी। इन क्षेत्रों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यह इलाका कल्याण सिंह की जन्मभूमि मढ़ौली से सीधे जुड़ा हुआ है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, राजस्व परिषद ने इस प्रस्ताव पर औचित्यपूर्ण रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट के बाद इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने पर यह जिला साल 2026 तक अस्तित्व में आ सकता है।
राजवीर सिंह ने की थी पहल, जनता से मिला समर्थन
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र और एटा से पूर्व सांसद राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया ने इस प्रस्ताव की पहल की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर यह मांग रखी कि उनके पिता की जन्मस्थली को न केवल ऐतिहासिक, बल्कि प्रशासनिक रूप से भी सम्मान मिलना चाहिए।
राजू भैया ने कहा था —
“कल्याण सिंह जी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दी। अतरौली और आसपास के क्षेत्र को उनके नाम से जोड़ा जाना लाखों लोगों की भावना का सम्मान है।”
इस प्रस्ताव को स्थानीय जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों और किसानों से भी विस्तृत समर्थन मिला है। लोगों का कहना है कि नए जिले के गठन से न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी बल्कि विकास योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करना आसान होगा।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से होगा लाभदायक कदम
अलीगढ़ के जिलाधिकारी संजीव रंजन ने मीडिया से बातचीत में बताया कि नया जिला बनने से शासन-प्रशासन की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
उन्होंने कहा —
“कल्याण सिंह नगर के गठन का प्रस्ताव राजस्व परिषद को भेजा गया है। प्रस्ताव की समीक्षा चल रही है। औचित्य रिपोर्ट तैयार होने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।”
अलीगढ़ का क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण यहाँ प्रशासनिक निगरानी कठिन हो जाती है। डिबाई और गंगीरी जैसे इलाके भौगोलिक रूप से मुख्यालय से दूर हैं, जिससे नागरिकों को छोटी-छोटी सरकारी प्रक्रियाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। नया जिला बनने से इन सभी क्षेत्रों में तेजी से प्रशासनिक सेवाएं पहुँच सकेंगी।
कल्याण सिंह की विरासत को संरक्षित करने का प्रयास
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं में थे जिन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक न्याय और विकास को साथ जोड़ा। अतरौली के मढ़ौली गाँव में जन्मे कल्याण सिंह दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।
उनकी पहचान एक कड़क प्रशासनिक छवि और सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए थी। भाजपा के भीतर और बाहर, उन्हें “जनता के मुख्यमंत्री” के रूप में याद किया जाता है। नया जिला उनके नाम पर बनाना, उनके योगदान को संस्थागत रूप से सम्मान देने का एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को भी कल्याण सिंह की सोच और कार्यशैली से जोड़ने का काम करेगा। साथ ही, यह कदम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक नए विकास केंद्र की नींव भी रखेगा।
2026 तक बन सकता है नया जिला
राजस्व परिषद की रिपोर्ट के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि भूमि, मानव संसाधन और वित्तीय संरचना से संबंधित औपचारिकताएं पूरी होते ही ‘कल्याण सिंह नगर जिला’ को 2026 तक अस्तित्व में लाने का लक्ष्य तय किया गया है।
इसके साथ ही यह जिला प्रदेश का 76वां जिला बन जाएगा। फिलहाल उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं और सरकार का उद्देश्य है कि नए जिले बनाकर जनता को बेहतर प्रशासनिक सेवा और त्वरित न्याय मिल सके।
प्रदेश सरकार पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में छह नए जिलों के गठन की दिशा में अध्ययन कर रही है। इनमें मुख्य रूप से — महोबा, मऊ, मथुरा, सिद्धार्थनगर और बस्ती जैसे क्षेत्रों के विभाजन के प्रस्ताव भी विचाराधीन हैं।
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