प्रयागराज: जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) के शिक्षकों के लिए मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी), प्रयागराज में पांच दिवसीय नवाचारी प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। यह प्रशिक्षण नवोदय विद्यालय समिति (NVS) और नेशनल नवोदय लीडरशिप इंस्टीट्यूट (NNLI) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण विधियों, नवाचारपूर्ण शिक्षण तकनीकों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप आधुनिक शिक्षा पद्धतियों से अवगत कराना है।
इस प्रशिक्षण में देशभर के लगभग 80 विज्ञान और जीवविज्ञान विषय के शिक्षक भाग ले रहे हैं, जिन्हें आधुनिक शिक्षण उपकरणों, डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म और छात्र-केंद्रित शिक्षा मॉडल के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एमएनएनआईटी के निदेशक प्रो. रमाशंकर वर्मा ने उद्घाटन सत्र में कहा कि “शिक्षक केवल तकनीकी रूप से दक्ष ही न हों, बल्कि वे शिक्षा को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ें। विद्यार्थियों में जिज्ञासा, नैतिकता और नवाचार की भावना जगाना ही वास्तविक शिक्षण है।” उन्होंने आगे कहा कि यह पहल भारत की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।
प्रो. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि “शिक्षक अब केवल ज्ञान के स्रोत नहीं, बल्कि छात्रों के साथ मिलकर ज्ञान के सह-निर्माता हैं। प्रौद्योगिकी शिक्षण का साधन है, लेकिन इसका उद्देश्य छात्रों के अंदर आत्मनिर्भरता और रचनात्मकता को बढ़ावा देना होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि नवोदय विद्यालय देशभर में ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने का कार्य कर रहे हैं और ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को नई शैक्षिक दृष्टि प्रदान करते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को डिजिटल क्लासरूम, ई-कंटेंट डेवलपमेंट, एआई-आधारित शिक्षण, STEM इनोवेशन, और सतत शिक्षा पद्धतियों पर व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। इस अवसर पर नवोदय विद्यालय समिति के वरिष्ठ अधिकारी, एमएनएनआईटी के प्राध्यापक और विभिन्न शिक्षा विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन सत्र में प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो शिक्षकों को “लर्निंग लीडर्स” बनाने पर बल देती है। इसका लक्ष्य शिक्षण-प्रशिक्षण की पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर शिक्षकों को आधुनिक, समावेशी और नवाचार-प्रधान शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है।



